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Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   'Rat race to extinction': Zoho's Sridhar Vembu says competitive exams creating zombified adults

Sridhar Vembu: 'परीक्षा का दबाव काबिलियत को नष्ट कर जॉम्बी तैयार कर रहा', ऐसा क्यों बोले जोहो के संस्थापक

Mon, 18 Mar 2024 01:50 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 18 Mar 2024 01:50 PM IST
सार

एक विज्ञापन में दावा किया गया था कि एक लड़की को कम अंक इसलिए आए क्योंकि उसने 'एक संस्थान विशेष को छोड़कर दूसरे संस्थान में दाखिला ले लिया। जोहो के संस्थापक ने एक शिक्षण संस्थान के इस विज्ञापन की कड़ी आलोचना की है।

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'Rat race to extinction': Zoho's Sridhar Vembu says competitive exams creating zombified adults
अमेरिकी कंपनी जोहो के संस्थापक श्रीधर वेंबु - फोटो : Twitter - @svembu

विस्तार

जोहो के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेम्बू ने भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव के बारे में कहा कि यह प्रतिभा को नष्ट कर देता है और जॉम्बी से वयस्कों का निर्माण करता है'। वेम्बू ने एक्स पर पोस्ट कर एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के विज्ञापन की आलोचना की। इस विज्ञापन में प्रतियोगी परीक्षा में कम अंक लाने के लिए एक छात्र के खिलाफ टिप्पणी की गई थी।

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जोहो प्रमुख ने एक शिक्षण संस्थान के विज्ञापन पर दी अपनी प्रतिक्रिया

एक विज्ञापन में दावा किया गया था कि एक लड़की को कम अंक इसलिए आए क्योंकि उसने संस्थान विशेष को छोड़कर दूसरे संस्थान में दाखिला ले लिया। श्रीधर ने माता-पिता के लिए नई मानसिकता पर जोर देते हुए कहा, "भारत को बच्चों और युवा वयस्कों को इस अति-प्रतिस्पर्धी परीक्षा के दबाव से बाहर निकालना होगा।"
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आईआरएस कात्यायनी संजय भाटिया ने इस विज्ञापन की आलोचना करते हुए इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया था। वेम्बू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जहां मैं पूर्वी एशिया से सीख नहीं लेनी चाहिए बल्कि फिनलैंड से सीख लेनी चाहिए जहां एक शानदार राज्य की ओर से वित्त पोषित शैक्षणिक प्रणाली है जो इस तरह के प्रतिस्पर्धी पागलपन के बिना हर बच्चे को आगे बढ़ाने में मदद करती है। तीव्र प्रतिस्पर्धा का भाव  बिजनेस करने वाली कंपनियों और खेल के मामले में होना चाहिए, न कि बच्चों की पढ़ाई के मामले में।"

वेम्बू ने लिखा- एक नियोक्ता के रूप में हम शैक्षणिक योग्यता पर विचार नहीं करते

वेम्बू ने लिखा, "एक नियोक्ता के रूप में, हमने शैक्षणिक योग्यता पर भी विचार नहीं करने का वचन दिया है। हम फिनलैंड से प्रेरित शैक्षिक विकल्पों में भी निवेश कर रहे हैं।" जोहो के सह-संस्थापक के विचारों को एक्स पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। एक यूजर ने लिखा, "यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि सोशल मीडिया से पहले हमारे अधिकांश माता-पिता सरकारी परीक्षाओं या प्रतियोगी परीक्षाओं से अलग नहीं सोच पाते थे। लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, निश्चित रूप से लोगों को और अधिक विकल्प मिलेंगे।"


एक यूजर ने लिखा, "सर, भारत में 25 लाख छात्र लगभग 55,000 सरकारी मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, क्योंकि निजी मेडिकल कोर्स के खर्च का वहन करना शीर्ष 2 पर्सेंटाइल में शामिल परिवारों के लिए भी असहनीय हैं। ऐसे में यह प्रतियोगिता कैसे दूर होगी?"

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