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PSU Banks: धोखाधड़ी के मुआवजे के रूप में बैंकों को देनी पड़ी तीन गुना राशि, FY 2024 में ₹140 करोड़ रहा आंकड़ा
Tue, 06 Aug 2024 05:34 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 06 Aug 2024 05:34 PM IST
सार
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2023-24 के दौरान अपने ग्राहकों की ओर से रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी या ई-धोखाधड़ी के मुआवजे के रूप में करीब 140 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में तीन गुना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी।
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पीएसयू बैंक
- फोटो : Istock
विस्तार
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2023-24 के दौरान अपने ग्राहकों द्वारा रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी या ई-धोखाधड़ी के मुआवजे में तीन गुना से अधिक 140 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि इन बैंकों द्वारा भुगतान की गई मुआवजे की राशि पिछले वित्त वर्ष में 42.70 करोड़ रुपये थी।
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उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 24 के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे अधिक 74.96 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया, इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया ने 20.38 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक ने 16.16 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
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FY23 में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया फिर से रु. 12.18 करोड़ के रूप में सबसे अधिक मुआवजा देने वाला था, इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया रु. 11.68 करोड़ था। सीतारमण ने आगे कहा कि आरबीआई ने जुलाई 2017 में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में ग्राहकों की देनदारी को सीमित करने के निर्देश जारी किए।
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उन्होंने कहा कि इन निर्देशों के अनुसार यदि बैंक की ओर से अंशदायी धोखाधड़ी या लापरवाही या कमी के कारण अनधिकृत लेनदेन होता है तो ग्राहक की कोई देनदारी नहीं बनती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां कमी न तो बैंक और न ही ग्राहक के पास है, बल्कि सिस्टम में कहीं और है, ग्राहक की देयता शून्य है, अगर वह बैंक से लेनदेन के संबंध में सूचना प्राप्त करने के तीन कार्य दिवसों के भीतर अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के बारे में बैंक को सूचित करता है।
उन्होंने कहा कि 4-7 कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट करने पर ग्राहक की देनदारी 5,000 रुपये से 25,000 रुपये तक हो सकती है और यदि 7 कार्य दिवसों के बाद रिपोर्ट की जाती है, तो यह बैंक की बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार निर्धारित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जहां नुकसान ग्राहक द्वारा लापरवाही के कारण होता है, ग्राहक तब तक पूरा नुकसान वहन करता है जब तक कि वह बैंक को अनधिकृत लेनदेन की सूचना नहीं देता। उन्होंने कहा कि अनधिकृत लेनदेन की जानकारी देने के बाद होने वाले किसी भी नुकसान को बैंक द्वारा वहन किया जाता है।