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बढ़ी महंगाई: खाद्य तेलों के दामों में लगी आग, पिछले साल के मुकाबले 62 फीसदी महंगे
Fri, 28 May 2021 03:27 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 28 May 2021 03:27 AM IST
सार
- इंडोनेशिया ने निर्यात शुल्क ढाई गुना बढ़ाया, भारत ने कस्टम ड्यूटी 35 प्रतिशत की
- खाद्य तेलों पर खर्च हर 100 में से 60 रुपए टैक्स में जा रहे हैं
- सब्जियों और दालों के दामों में भी बढ़ोतरी होने से खाने की थाली हुई महंगी
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : pixabay
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विस्तार
अचानक बढ़े करों की मार ने खाद्य तेलों के दाम पिछले 3 महीनों के दौरान डेढ़ गुने से अधिक बढ़ा दिए हैं। सब्जियों और दालों के दाम में भी आग लगी हुई है।
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पाम तेल की खुदरा कीमतें 138 रुपये प्रति किलोग्राम हैं। एक साल पहले कीमत 85 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक साल में 62 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
पाम तेल के तेजी से बढ़ते दामों के पीछे इंडोनेशिया द्वारा लगाए जा रहे टैक्स में अचानक की गई बढ़ोतरी है। इंडोनेशिया से आयात होने वाले पाम आयल पर अब वह 400 डॉलर प्रति टन टैक्स वसूल रहा है। उसने पाम ऑयल पर निर्यात कर अप्रैल के 116 डॉलर से बढ़ाकर मई में 140 डॉलर प्रति टन कर दिया है। यही नहीं निर्यात लेवी भी 55 डॉलर प्रति टन से बढ़ाकर 255 डॉलर कर दी है।
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चूंकि हमारे यहां अपनी जरूरत का मात्र 35 प्रतिशत खाद्य तेल का ही उत्पादन होता है और 65 प्रतिशत तेल का आयात किया जाता है, इसीलिए घरेलू बाजार में तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के दामों पर निर्भर होते हैं।
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भारत ने भी घरेलू तेल उत्पादकों के हित संरक्षण के लिए पाम ऑयल पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा कर 35 प्रतिशत कर दी। यानी आज पाम तेल के दामों में लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा टैक्स का है।
पाम तेल के दाम बढ़ने से दूसरे खाद्य तेलों के दाम भी अचानक बढ़ा दिए गए। सरसों तेल का आज 180 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल मई महीने में यह 115 रुपये प्रति किलो था। यानी एक वर्ष में 65 रुपए की बढ़ोतरी। पिछले महीने ही सरसों तेल की कीमत 155 रुपये प्रति किलो थी। यानी एक महीने में 25 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस महीने मूंगफली के तेल का औसत दाम 175 रुपये रहा। वनस्पति की कीमत 129 रुपये रही। सोयाबीन तेल 148 रुपये का हो गया। सनफ्लावर तेल 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
सोमवार को सरकार ने इस बारे में सभी संबंधित पार्टियों की एक बैठक बुलाई। बैठक में खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्?ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी देखने को मिली है लेकिन भारत में वृद्धि उसके मुकाबले ज्यादा है।
लेकिन इसके बावजूद बैठक में घरेलू तेल उत्पादकों ने आयात शुल्क में कटौती का विरोध किया। उनका कहना था कि शुल्क में कटौती से घरेलू बाजार में आयातित तेल की कीमतें कम हो जाएंगी और तिलहन उत्पादकों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
टैक्स में कटौती का विरोध
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर देसाई का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान घटी बिक्त्रस्ी भी बढ़े दामों का एक कारण है। सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड के अध्यक्ष सुरेश नागपाल का भी कहना था टैक्स कम करने से खरीफ की फसल के रकबे पर असर पड़ सकता है।
सब्जियां, दालें भी महंगी
भले ही किसानों को टमाटर के दाम 5 रुपए प्रति किलो भी नहीं मिल पा रहा हो लेकिन खुदरा बाजार में टमाटर की कीमत 35 रुपए प्रति किलो है। आलू 30 रुपए, प्याज 40 रुपए प्रति किलो है तो अन्य सब्जियां 70 रुपए प्रति किलो से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक रही हैं। दालों के दाम भी 80 रुपए प्रति किलो से 210 रुपए प्रति किलो हैं।