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PMFBY: फसल बीमा योजना में सरकार करेगी सुधार, बढ़ते प्रीमियम को कम करने की हो रही तैयारी

Thu, 01 Sep 2022 04:32 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Thu, 01 Sep 2022 04:32 PM IST
सार

PMFBY: फरवरी 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल के नुकसान या क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

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PMFBY: Government will improve the crop insurance scheme, wants to reduce the increasing premium
पीएम फसल बीमा योजना - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

बीमा कंपनियों को लुभाने और प्रीमियम को युक्तिसंगत बनाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में सुधार करने की तैयारी कर रही है।

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सरकार की ओर से चल रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में कुछ बीमा कंपनियों की ओर से लाभ कमाने की खबरों के बीच केंद्र प्रीमियम दरों को युक्तिसंगत बनाने और बीमाकर्ताओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम में सुधार करने की योजना बना रहा है।

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सूत्रों के मुताबिक योजना में संभावित महत्वपूर्ण बदलाव 2023-24 फसल वर्ष (जुलाई-जून) से कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किए जाएंगे।

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बता दें कि फरवरी 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल के नुकसान या क्षति से पीड़ित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

इस योजना में खरीफ (गर्मी) के मौसम में उगाई जाने वाली सभी खाद्य और तिलहन फसलों के लिए किसानों की ओर से देय अधिकतम प्रीमियम दो प्रतिशत जबकि रबी (सर्दियों) के मौसम में उगाई जाने वाली समान फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत है।

किसानों की ओर से देय प्रीमियम और बीमा शुल्क की दर के बीच का अंतर केंद्र और राज्यों की ओर से समान रूप से साझेदारी करते हुए चुकाया जाता है। 

किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी को सुनिश्चित करने और किसी भी मामले में 72 घंटों के भीतर फसल के नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के लिए इस योजना में अंतिम बार वर्ष 2020 में संशोधन किया गया था।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पीएमएफबीवाई  योजना में सरकार को और ज्यादा सुधार की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि इसमें बीमा कंपनियों का जोखिम घटता जा रहा था। जानकारों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण मौजूदा बीमाकर्ता उच्च प्रीमियम दर वसूलने लगे हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए बीमा कंपनियों को एक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से तीन फसल वर्षों के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। 2019-20 से 2022-23 तक की अवधि के लिए लगभग 18 बीमा कंपनियों को पैनल में रखा गया था। हालांकि, उनमें से आठ आगे चलकर बाहर हो गए और दस कंपनियां अब इस योजना में भाग ले रहीं हैं।

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