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उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक पर प्रतिंबंध के बाद बढ़ गए रद्दी के भाव

Mon, 16 Jul 2018 01:29 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 16 Jul 2018 01:29 PM IST
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plastic ban in uttar pradesh has increased demand for paper products

उत्तर प्रदेश में रविवार से लागू हुए प्लास्टिक बैन के बाद पूरे प्रदेश में एकाएक कागज से बने बैग की मांग में इजाफा देखने को मिला है। अखबार की रद्दी के दाम भी बढ़ गए हैं। वहीं दूसरी तरफ पॉलिथिन बनाने वाली निर्माण इकाइयों में काम पूरी तरह से ठप्प हो गया है। 

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बनाने-बेचने पर लगेगा एक लाख तक का जुर्माना
प्रदेश में इसके लिए सरकार की तरफ से अध्यादेश को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद सजा के प्रावधानों को काफी कठोर बनाया गया है। पॉलिथीन या प्लास्टिक की सामग्री के प्रयोग पर प्रतिबंध का पहली बार उल्लंघन पर एक माह की सजा या न्यूनतम एक हजार और अधिकतम 10 हजार रुपये तक जुर्माना देना होगा। दूसरी बार के उल्लंघन पर छह माह की जेल या न्यूनतम 5 हजार व अधिकतम 20 हजार रुपये तक जुर्माना देना होगा।
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इसी तरह  प्लास्टिक के कैरीबैग के विक्रय, वितरण, उत्पादन, भंडारण और परिवहन पर लगे प्रतिबंध का पहली उल्लंघन करने पर छह माह की जेल या न्यूनतम 10 हजार व अधिकतम 50 हजार तक का जुर्माना देना होगा। दूसरी बार उल्लंघन पर एक वर्ष तक की सजा एवं न्यूनतम 10 हजार व अधिकतम एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा।

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कच्चे माल की कीमतों में भी अंतर

plastic ban in uttar pradesh has increased demand for paper products

पॉलीथिन बैग के लिए कच्चा माल 150 रुपये किलो के हिसाब से मिलता है जबकी रिसाइकिल बैग्स के लिए कीमत 35 रुपये प्रति किलो है। लेकिन 1 किलो प्लास्टिक से कागज के मुकाबले कई गुना ज्यादा बैग बनते हैं। अभी सबसे कम कीमत का कागज बैग भी 6 रुपये में मिलता है। लेकिन अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो जल्द ही 3 से 4 रुपये में कागज से बने हुए बैग मिलने लगेंगे।

बढ़ गए रद्दी के दाम
अभी बैन को लगे एक ही दिन हुआ है, लेकिन प्रदेश में कई जगह अखबार की रद्दी के भाव भी बढ़ गए हैं। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में जहां शनिवार तक रद्दी का भाव 10 रुपये किलो थो, वो सोमवार को 16-20 रुपये के बीच पहुंच गया है। वहीं जिले स्तर पर भी अधिकारियों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को अमली-जामा पहनाना शुरू कर दिया है। 

रविवार को कई जगह हो रहा था पॉलीथिन का प्रयोग
हालांकि अध्यादेश के लागू होने के पहले दिन कई जगह पॉलीथिन का प्रयोग होते हुए देखा गया। वहीं कुछ दुकानदार छापा पड़ने के डर से ग्राहकों को पन्नी में सामान देने से बच रहे थे और उनसे खुद ही थैला लाने के लिए कह रहे थे। 

कागज की पैकिंग का बढ़ा बाजार
कागज से बने बैग, कप और स्ट्रा जैसे आइटम का बाजार भी तेजी से बढ़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा फायदा कागज से होने वाली पैकेजिंग को हुआ है। पिछले 1-2 सालों में कागज पैकेजिंग करीब 20 फीसदी बढ़ी है और अभी कागज का 70 फीसदी पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होता है। अगर राज्य प्लास्टिक बैन का सही से पालन करें तो पेपर बैग इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

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