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Parliament: संसद से बैंकिंग कानून में संशोधन विधेयक को मंजूरी, एनपीए का मुद्दा उछला तो मंत्री ने दिया यह जवाब
Wed, 26 Mar 2025 07:11 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 26 Mar 2025 07:11 PM IST
सार
Parliament: संसद से बैंकिंग कानून में संशोधन विधेयक को मंजूरी मिल गई है। उच्च सदन में बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए, कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने 2024 तक 50 विलफुल डिफाल्टर्स का 87,000 करोड़ रुपये का बकाया माफ कर दिया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
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विस्तार
बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 बुधवार को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। कानून में संशोधन के बाद बैंक खाताधारकों को अधिकतम चार नॉमिनी रखने की अनुमति मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसका मकसद बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह विधेयक पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में पारित हुआ था।
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तीन घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, इस विधेयक का लक्ष्य जवाबदेही सुनिश्चित करना, बैंकों में प्रशासन बेहतर बनाना, जमाकर्ताओं को अपने खाते के लिए अधिकतम चार नॉमिनी की अनुमति देना, बैंक निदेशक पद व रिपोर्टिंग को समय सीमा के नियमों में बदलाव करना है। अब खाताधारक चार लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं। खाताधारक की मृत्यु के बाद धन वितरण में सहूलियत होगी, जो अभी एक समस्या बनी हुई है। ब्यूरो
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राइट ऑफ का मतलब कर्जमाफी नहीं
सीतारमण ने कर्जमाफी का मुद्दा उठाए जाने का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, राइट ऑफ का मतलब यह नहीं है कि कर्ज माफ कर दिया गया है, बल्कि बैंक धन वसूली के प्रयास जारी रखेंगे। सहकारी क्षेत्र के बैंकों ने पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 1.41 करोड रुपये अब तक का सबसे अधिक लाभ कमाया है।
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सरकार चुप बैठने वाली नहीं
वित्त मंत्री ने कहा, देश में बैंकिंग प्रणाली ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों का एनपीए 2.5 फीसदी कम हुआ है। अब सरकार चुप बैठने वाली नहीं है।
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एनपीए में आई भारी कमी
वित्त मंत्री ने कहा, सरकार के प्रयासों से एनपीए में भारी कमी आई है। सरकार जानबूझकर कर्जा नहीं चुकाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले 5 वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी से संबंधित लगभग 112 मामले अपने हाथ में लिए हैं। इसमें जानबूझकर कर्ज ना चुकाने वालों से भी संबंधित मामले हैं।
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