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आज मिल सकती है पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत, ओपेक देश बढ़ा सकते हैं कच्चे तेल का उत्पादन

Fri, 22 Jun 2018 12:53 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 22 Jun 2018 12:53 PM IST
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opec contries to decide today on rising crude oil production
शुक्रवार को देशवासियों को बढ़ते हुए पेट्रोल-डीजल के दामों पर बड़ी राहत मिल सकती है। सऊदी अरब ने फिर से तेल की सप्लाई बढ़ाने की वकालत की है। सऊदी अरब के तेल मंत्री ने कहा है कि मौजूदा माहौल में तेल की सप्लाई 10 लाख बैरल बढ़ाने की जरूरत है।
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साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि ओपेक के फैसले ग्राहकों और बाजार के हित में रहेंगे। उन्होंने कहा कि तेल की मांग काफी ज्यादा है, ऐसे में सप्लाई में कमी आती है तो ये बड़ी चिंता की बात होगी। अगर उत्पादन बढ़ाने के लिए निर्णय होता है तो फिर भारत में इसका असर देखने को मिलेगा।  
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गिरा कच्चे तेल का दाम
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम पिछले 30 दिनों में 6 डॉलर प्रति बैरल कम हो गया है। इस वजह से फिलहाल भारत के लोगों को भी इसका फायदा मिल रहा है। ओपेक देश भी शनिवार को फैसला लेंगे कि वो उत्पादन को बढ़ाएं या फिर कीमतों को ऊंचा रखने के लिए उत्पादन में कटौती करें।
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अगर कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती होती है, तो फिर भारत अपनी निर्भरता अरब देशों के बजाए अमेरिका और चीन पर कर देगा, जिससे दाम नियंत्रण में रह सकेंगे। पेट्रोल व डीजल को अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है, तो उस पर लगने वाले कर की संरचना में 28 फीसदी जीएसटी तथा राज्यों द्वारा लगाया गया कर या मूल्य वर्धित कर (वैट) शामिल हो सकता है। केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी है। 

जीएसटी की सबसे उच्च दर (28 फीसदी) तथा वैट दोनों को मिलाकर उतना ही कर भार होगा, जितना यह दोनों ईंधनों पर मौजूदा समय में लग रहा है, जिसमें उत्पाद शुल्क तथा राज्यों द्वारा लगाया गया वैट शामिल है।

आज इतनी गिरी कीमतें

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शुक्रवार को पेट्रोल की कीमतों में तेल कंपनियों ने राहत दी है। महानगरों में पेट्रोल 18 पैसे प्रति लीटर तक सस्ता हो गया है। दिल्ली में जहां पेट्रोल 14 पैसे प्रति लीटर, वहीं कोलकाता में 13 पैसे, मुंबई में 18 पैसे और चेन्नई में 15 पैसे प्रति लीटर तक सस्ता हुआ है। हालांकि डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

प्रपोजल पर पहले ईरान सहित 3 ने विरोध जताया था, लेकिन अब वह भी कम मात्रा में सप्लाई बढ़ाने पर सहमत हो गया है। वहीं, रूस भी प्रोडक्शन बढ़ाने पर सहमत है। अगर प्रोडक्शन बढ़ाने पर सहमति बनती है तो क्रूड में गिरावट बन सकती है। फिलमाल अब मार्केट की नजर इसी फैसले पर है। 

क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर
बता दें कि 2016 के अंत में क्रूड की गिरती कीमतों को देखते हुए ओपेक और नॉन ओपेक देशों ने क्रूड प्रोडक्शन घटाने को लेकर एग्रीमेंट किया था। जिसके बाद पिछले 2 साल में क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। गुरूवार को क्रूड की कीमतें करीब 74 डॉलर प्रति बैरल के रेंज पर बंद हुईं। सप्लाई बढ़ने के संकेतों से पिछले एक महीने के दौरान क्रूड में करीब 6 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आ चुकी है। 

तनातनी बढ़ी, ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ने छोड़ी बैठक

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ईरान के पेट्रोलियम मंत्री तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की बैठक छोड़कर बाहर चले गए। दरअसल , सऊदी अरब ओपेक देशों से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ गयी है। 

ओपेक बैठक की पूर्व संध्या पर आयोजित मंत्रियों के समूह ने तेल उत्पादन बढ़ाने को लेकर चर्चा की। इसके बाद ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान नामदार जंगानेह ने संवाददाताओं से कहा, " मुझे नहीं लगता है कि हम किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं। " 

इस वार्ता को ओपेक बैठक की तैयारी के रूप में देखा जा रहा था। 14 सदस्यीय ओपेक देशों के बीच आज बैठक होनी है। बैठक में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। जनवरी 2017 से उत्पादन में कटौती जारी है लेकिन अब सऊदी अरब ने कच्चे तेल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने की वकालत की है। इस मामले में रूस सऊदी अरब का समर्थन कर रहा है। 

हालांकि उत्पादन बढ़ाने के प्रस्ताव का ईरान, इराक और वेनेजुएला ने विरोध किया है। इन देशों को लगता है कि तुरंत उत्पादन बढ़ाने से इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और इनकी बाजार हिस्सेदारी तथा राजस्व का नुकसान होने का डर है। 

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