अदाणी मामला: 'विशेषज्ञ समिति में ओपी भट्ट की मौजूदगी हितों का टकराव', याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में ये कहा
Adani Row: याचिकाकर्ता अनामिका जायसवाल ने दावा किया कि भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ओपी भट्ट, जो छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का हिस्सा हैं, से हितों का टकराव संभव है क्योंकि वह अक्षय ऊर्जा फर्म ग्रीनको के प्रमुख भी हैं, जिसका अदाणी समूह के साथ वाणिज्यिक लेनदेन है।
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उच्चतम न्यायालय में सोमवार को दायर एक नई याचिका में कहा गया है कि अदाणी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति में ऐसे सदस्य हैं जिनके रहते हुए हितों का टकराव हो सकता है। छह सदस्यीय समिति ने मई में अपनी अंतरिम रिपोर्ट में अदाणी समूह के शेयरों में तेजी और गिरावट में कोई नियामकीय विफलता या कीमतों में हेरफेर के संकेत नहीं पाए थे, जिससे संकटग्रस्त समूह को राहत मिली थी। अदाणी समूह को हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बाजार मूल्य में लगभग 150 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।
याचिकाकर्ता अनामिका जायसवाल ने किया ये दावा
याचिकाकर्ता अनामिका जायसवाल ने दावा किया कि भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व चेयरमैन ओपी भट्ट, जो छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का हिस्सा हैं, से हितों का टकराव संभव है क्योंकि वह अक्षय ऊर्जा फर्म ग्रीनको के प्रमुख भी हैं, जिसका अदाणी समूह के साथ वाणिज्यिक लेनदेन है। याचिका में ग्रीनको के 14 मार्च, 2022 के प्रेस बयान का हवाला देते हुए अदाणी के प्रस्तावित औद्योगिक परिसर को 1,000 मेगावाट तक नवीकरणीय बिजली की आपूर्ति की घोषणा की गई थी। इसमें दावोस में दोनों के बीच साझेदारी की खबरों का भी हवाला दिया गया है। उन्होंने कहा, "यह बात ओपी भट्ट के हितों के स्पष्ट टकराव को दर्शाता है. भट्ट को खुद इस ओर ध्यान दिलाना चाहिए था।"
समिति में सोमशेखर सुंदरेसन की मौजूदगी पर भी सवाल
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सीबीआई ने पूर्व शराब कारोबारी और भगोड़े आर्थिक अपराधी विजय माल्या को ऋण देने में कथित गड़बड़ी के मामले में मार्च 2018 में भट्ट से भी पूछताछ की थी। माल्या पर एसबीआई समेत अन्य बैंक से 1.2 अरब डॉलर का ऋण लेकर धोखाधड़ी का आरोप है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि भट्ट 2006 से 2011 के बीच एसबीआई के चेयरमैन थे उस दौरान माल्या की कंपनियों को ज्यादातर कर्ज दिए गए थे। याचिका में समिति के दो अन्य सदस्यों केवी कामत (जो 1996 से 2009 के बीच आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन रहे थे) और सेबी बोर्ड सहित विभिन्न मंचों पर अदाणी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील सोमशेखर सुंदरेसन की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मौजूदा विशेषज्ञ समिति देश के लोगों में विश्वास पैदा करने में विफल रहेगी: याचिकाकर्ता
ईडी ने दावा किया कि कामत का नाम आईसीआईसीआई बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की उस प्राथमिकी में आया था जो वीडियोकॉन समूह को दिए गए ऋण के लिए पूर्व प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर को मिली कथित रिश्वत से संबंधित है। इसमें कहा गया है, "ऐसी आशंका है कि मौजूदा विशेषज्ञ समिति देश के लोगों में विश्वास पैदा करने में विफल रहेगी।" इसलिए सम्मानपूर्वक प्रार्थना की जाती है कि इस माननीय न्यायालय की ओर से एक नई विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए, जिसमें वित्त, कानून और शेयर बाजार के क्षेत्र के विशेषज्ञ त्रुटिहीन ईमानदारी के साथ हों, और जिनका इस मामले के परिणाम में हितों का कोई टकराव न हो।
हिंडनबर्ग रिसर्च ने 24 जनवरी अदाणी समूह के बारे में जारी की थी रिपोर्ट
हिंडनबर्ग रिसर्च ने 24 जनवरी की अपनी रिपोर्ट में लेखा धोखाधड़ी, शेयर कीमतों में हेरफेर और कर पनाहगाहों के अनुचित इस्तेमाल का आरोप लगाया था, जिससे अदाणी समूह शेयरों में में गिरावट आई थी और इसका बाजार मूल्य में करीब 150 अरब डॉलर तक कम हो गया था। हालांकि अदाणी समूह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था और बाजार नियामक सेबी को समूह के खिलाफ पहले से शुरू की गई जांच पूरी करने के लिए कहा था। समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने की और इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेपी देवधर और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि भी शामिल थे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को अदाणी मामले की अगली सुनवाई करेगा।
सेबी पर डीआरआई अलर्ट छिपाने का आरोप
जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग हालिया याचिका में कहा कि सेबी ने जनवरी 2014 के उस डीआरआई अलर्ट को छिपाया है कि अदाणी समूह ने पैसे की हेराफेरी की और इसे दुबई और मॉरीशस में स्थित संस्थाओं के माध्यम से अदाणी की सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश किया। उन्होंने कहा, 'सेबी के तत्कालीन चेयरपर्सन यूके सिन्हा ने डीआरआई के पत्र पर कार्रवाई करने के बजाय अदाणी के खिलाफ चल रही जांच को बंद करना पसंद किया। यहां यह उल्लेख करना उचित है कि जनवरी 2014 में सेबी अध्यक्ष रहे सिन्हा 18 फरवरी 2011 को नियुक्त किए गए थे। वे 1 मार्च 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। सिन्हा वर्तमान में एनडीटीवी के 'गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक-चेयरपर्सन' के रूप में कार्यरत हैं, इसे 2022 में अदाणी समूह की ओर से अधिग्रहित किया गया है।