फरवरी तक मिलेगी प्याज की बढ़ती कीमतों में राहत, 3300 प्रति क्विंटल के पार पहुंची कीमत
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अगर आप प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो फिर अगले साल फरवरी तक इनमें कमी आने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। प्याज का थोक भाव इस वक्त 3300 रुपये प्रति क्विंटल के पार चला गया है। यह तब हो रहा है जब मंडियों में प्याज की आवक पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो गई है।
लगातार बढ़ रही हैं कीमतें
देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में प्याज के दाम रोजाना बढ़ रहे हैं। शनिवार को मंडी में करीब 20700 क्विंटल प्याज की आवक हुई और भाव 3300 रुपये था। इससे पहले शुक्रवार को कीमत 3251 रुपये प्रति क्विंटल थी।
ओखी तूफान बना बड़ी वजह
प्याज उत्पादक राज्यों जैसे कि गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में ओखी तूफान की वजह से भारी बारिश हो रही है, जिससे सप्लाई काफी प्रभावित हो गई है। इन राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में भी प्याज की बढ़ रही डिमांड के कारण प्राइस में इजाफा हो रहा है।
सरकार ने लगाई हुई है स्टॉक लिमिट
टमाटर की तरह प्याज भी रंग न दिखाए, इसके लिए केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को इस पर स्टॉक लिमिट लगाने का निर्देश दे दिया है।केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को यहां बताया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित रहे, इसके लिए सभी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को प्याज के व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लगाने का निर्देश दिया है। इस निर्णय को मंत्रालय ने पहले ही अधिसूचित कर दिया है।
अब राज्य सरकार प्याज के संबंध में स्टॉक सीमा लगा सकेंगे और जमाखोरीरोधी ऑपरेशनों, सट्टेबाजों और मुनाफाखोरों के विरूद्ध कार्रवाई करने जैसे विभिन्न कदम उठा सकेंगे।
मंत्रालय के मुताबिक हाल ही के सप्ताहों में, विशेषत: इस वर्ष जुलाई माह के अंत से आगे प्याज की कीमतों में हुई असामान्य वृद्धि के चलते यह कदम उठाना आवश्यक था। जांच के उपरांत पता चला कि प्याज के मूल्यों में असामान्य वृद्धि करने वाले कारणों में प्याज की कमी के अलावा कुछ अन्य कारण भी हैं जैसे कि जमाखोरी और सट्टेबाजी आदि।
इसलिए राज्यों को ऐसे व्यापारियों, जो प्याज की सट्टेबाजी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी से जुड़े हैं, के विरूद्ध कार्रवाई करने के लिए समर्थ बनाना आवश्यक था। सरकार का मामनना है कि इन उपायों से प्याज की कीमतों में उचित स्तर तक कमी आने का अनुमान है जिससे उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलेगी।
बढ़ गई थी महंगाई दर
अक्टूबर महीने में थोक महंगाई दर अपने छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। प्याज-टमाटर सहित अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से महंगाई दर 3.59 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पहले सितंबर में थोक महंगाई दर 2.60 फीसदी थी, वहीं पिछले साल अक्टूबर में यह 1.27 फीसदी रही थी।
इससे पहले इस साल अप्रैल में थोक महंगाई दर 3.85 फीसदी रही थी। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सब्जियों के दामों में हुई जो अक्टूबर में 36.61 फीसदी बढ़ गए। इससे पहले सितंबर में यह 15.48 फीसदी था।
खुदरा महंगाई दर में भी हुआ इजाफा
महंगे खाद्य पदार्थों खासकर सब्जियों की ऊंची कीमतों के कारण अक्तूबर महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.58 फीसदी रही, जो सात माह का उच्च स्तर है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर सितंबर महीने में 3.28 फीसदी थी।
बीते साल अक्तूबर में खुदरा महंगाई दर 4.2 फीसदी थी। इससे पहले, यह इस साल मार्च माह में 3.89 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर माह में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर बढ़कर 1.9 फीसदी रही। सितंबर माह में यह 1.25 फीसदी थी।