60 रुपये से नीचे आ सकती है प्याज की कीमत, फरवरी तक लगेगा निर्यात पर बैन
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अगले सप्ताह तक प्याज के सस्ते होने की उम्मीद खासी बढ़ गई हैं। दरअसल निजी कारोबारियों ने प्याज के आयात के लिए ऑर्डर दिए हैं, जिसमें से कम से कम 1,000 टन प्याज इस महीने के अंत तक आने का अनुमान है। इससे खुदरा कीमतों में कमी आएगी, जो अभी तक 60 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
एक सप्ताह पहले राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमतें लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई थीं, लेकिन सरकार द्वारा कई कदम उठाने के बाद कीमतों में नरमी आई। हालांकि दिल्ली सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी तक प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘निजी कारोबारियों ने सरकार को बताया कि उन्होंने थोड़ी मात्रा में प्याज का आयात किया है। कारोबारियों को इस महीने के अंत तक 1 हजार टन प्याज की डिलिवरी मिलने की उम्मीद है।’
अधिकारी ने कहा कि शिपमेंट आसानी से आ जाएगी, क्योंकि सरकार ने प्याज के आयात के वीस्ते दिसंबर के अंत तक के लिए फाइटोसैनिटरी और फ्यूमिगेशन नियमों को खासा लचीला कर दिया है। घरेलू उपलब्धता में सुधार और कीमतों को थामने के लिए सरकार निजी के शआथ सरकारी ट्रेडिंग एजेंसियों के माध्यम से प्याज के आयात को आसान बना रही है। वहीं सरकार ने एमएमटीसी के माध्यम से 1 लाख टन प्याज के आयात का भी फैसला लिया है, जिसमें 4 हजार टन के लिए निविदाएं मंगा ली गई हैं।
फरवरी तक प्याज निर्यात पर प्रतिबंध
सरकार प्याज की कीमतों को थामने के लिए इसके निर्यात पर फरवरी तक प्रतिबंध जारी रख सकती है। सरकार ने घरेलू बाजार में प्याज की महंगाई को थामने के लिए सितंबर में सितंबर में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि, इसके बावजूद भारत में कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही। इसकी वजह देश में प्याज के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों से प्याज की सीमित आपूर्ति थी। इस महीने की शुरुआत में प्याज की थोक कीमतें 55 रुपये से घटकर 40 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थीं, जो छह साल में सबसे ज्यादा थीं।