USCIRF: ओबामा को अपनी ऊर्जा भारत की आलोचना की जगह सराहना में खर्च करनी चाहिए, जानें क्या बोले पूर्व कमिश्नर
USCIRF: मूर की यह टिप्पणी ओबामा की ओर से हाल ही में सीएनएन को दिए गए एक साक्षात्कार के बाद आई है, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से से कहा गया था कि बाइडेन को भारत के साथ धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाना चाहिए, जैसा कि वह तब भी करते जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति होते।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) के एक पूर्व आयुक्त जॉनी मूर ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भारत की आलोचना करने से ज्यादा उसकी तारीफ करने में अपनी ऊर्जा खर्च करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि पूर्व राष्ट्रपति (ओबामा) को भारत की आलोचना करने से ज्यादा भारत की तारीफ करने में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए। भारत मानव इतिहास में सबसे विविध देश है। संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह यह एक आदर्श देश नहीं है, लेकिन इसकी विविधता इसकी ताकत है और हमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हर मौके पर सराहना करनी चाहिए।
'Obama should spend his energy complimenting than criticizing,' Johnnie Moore on India under PM Modi
Read @ANI Story | https://t.co/3Pqb9En9LZ#PMModi #BarackObama #JohnnieMoore pic.twitter.com/6yhYyD0gaV— ANI Digital (@ani_digital) June 26, 2023विज्ञापन
मूर की यह टिप्पणी ओबामा की ओर से हाल ही में सीएनएन को दिए गए एक साक्षात्कार के बाद आई है, जिसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से से कहा गया था कि बाइडेन को भारत के साथ धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाना चाहिए, जैसा कि वह तब भी करते जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति होते। सीएनएन को दिए साक्षात्कार में ओबामा ने कहा कि अगर भारत जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करता है तो इस बात की प्रबल संभावना है कि देश बिखरेगा। ओबामा ने सीएनएन के साक्षात्कारकर्ता क्रिस्टियान अमनपुर से यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति जो बाइडन प्रधानमंत्री मोदी से मिलते हैं तो बहुसंख्यक हिंदू भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का उल्लेख किया जाना चाहिए।
भारत और चीन से संबंधित एक सवाल पूछे जाने पर ओबामा ने कहा कि उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, 'वैसे, अगर मेरी प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत होती, जिन्हें मैं अच्छी तरह जानता हूं, तो मेरे तर्क का एक हिस्सा यह होगा कि यदि आप भारत में जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करते हैं, तो इस बात की प्रबल संभावना है कि भारत कभी न कभी अलग होना शुरू कर दे। हमने देखा है कि क्या होता है जब आप इस तरह के बड़े आंतरिक संघर्ष प्राप्त करना शुरू करते हैं। ओबामा ने सीएनएन को बताया, "इसलिए यह न केवल मुस्लिम भारतीयों बल्कि हिंदू भारतीयों के हितों के भी विपरीत होगा। मुझे लगता है कि इन चीजों के बारे में ईमानदारी से बात करने में सक्षम होना महत्वपूर्ण है। चीजें उतनी साफ नहीं होंगी जितनी आप चाहते हैं, क्योंकि दुनिया जटिल है।"