पेट्रोल पंपों पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर नहीं मिलेगा कैशबैक, बैंकों ने खत्म की व्यवस्था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पेट्रोल पंपों पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर एक अक्तूबर से अब कोई छूट नहीं मिलेगी। अभी तक सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां क्रेडिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर 0.75 फीसदी की छूट दे रही हैं। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए करीब ढाई साल पहले क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर छूट देने की व्यवस्था शुरू की गई थी। उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि डेबिट कार्ड और अन्य डिजिटल तरीके से भुगतान करने पर छूट मिलती रहेगी।
देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने क्रेडिट कार्डधारक ग्राहकों को भेजे गए एसएमएस में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की सलाह पर एक अक्तूबर, 2019 से पेट्रोल पंप पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर मिलने वाली 0.75 फीसदी की छूट को बंद किया जा रहा है। इससे पहले 2016 के आखिर में नोटबंदी के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन आयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) को पेट्रोल-डीजल की खरीद के लिए कार्ड से भुगतान पर 0.75 फीसदी की छूट देने का निर्देश दिया था।
क्रेडिट-डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट के जरिए 0.75 फीसदी की छूट को दिसंबर, 2016 में शुरू किया गया था। यह व्यवस्था ढाई साल से अधिक समय तक चली। अब इसे बंद करने का फैसला किया गया है। नकद छूट के अलावा सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को कार्ड भुगतान शुल्क ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) का बोझ भी वहन करने को कहा था। आम तौर पर एमडीआर की लागत रिटेलर वहन करता है।
2,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं कंपनियां
तीनों सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा विक्रेताओं ने वित्त वर्ष 2018-19 में ई-भुगतान पर छूट देने और एमडीआर के रूप में बैंकों को भुगतान करने के रूप में 2,000 करोड़ रुपये दिए। वहीं, 2017-18 में यह आंकड़ा 1,431 करोड़ रुपये रहा। इसमें से खुदरा विक्रेताओं ने ई-भुगतान पर छूट के रूप में 1,165 करोड़ रुपये और एमडीआर के रूप में बैंकों को 266 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। पिछले साल अगस्त में तेल कंपनियों ने सभी फ्लीट ग्राहकों के लिए छूट को 0.75 फीसदी से 0.25 फीसदी कर दिया था।