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Niti Aayog: 'भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर जल्द बनेगी सहमति'; नीति आयोग के CEO को उम्मीद, दिया यह तर्क

Mon, 06 Oct 2025 04:30 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 06 Oct 2025 04:30 PM IST
सार

नीति आयोग के सीईओ ने 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' के शुभारंभ के मौके पर कहा कि भारत और अमेरिका अब भी व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले महीने बातचीत हुई थी, इसलिए मुझे लगता है कि दोनों पक्ष समझौते के प्रति आशावान हैं। उन्होंने आगे क्या कहा आइए जानें। 
 

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Niti Aayog CEO hopeful of early trade pact between India, US
नीति आयोग के सीईओ - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने सोमवार को यह बात कही।उन्होंने कहा है कि दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुब्रह्मण्यम ने बताया कि भारत को टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना चाहिए और विनिर्माण में प्रतिस्पर्धात्मकता स्तर पर सुधार के लिए अपने बाजारों को खोलना चाहिए।

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नीति आयोग के सीईओ ने 'ट्रेड वॉच क्वार्टरली' के शुभारंभ के अवसर पर कहा, "अच्छी बात यह है कि दोनों पक्ष अब भी व्यापार समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले महीने बातचीत हुई थी, इसलिए मुझे लगता है कि दोनों पक्ष समझौते की उम्मीद कर रहे हैं।"
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच संबंधों गंभीर तनाव दिखा। इसमें भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। भारत ने अमेरिका की इस कार्रवाई को "अनुचित, और अविवेकपूर्ण" बताया था।
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भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ के असर पर बोलते हुए सुब्रह्मण्यम ने कहा, "व्यापार चैनल बनाना कठिन है, और व्यापार चैनल को समाप्त करना भी कठिन है... क्रिसमस तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।" हालांकि नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि यदि दोनों देश व्यापार समझौते पर सहमत नहीं होते हैं तो समस्या हो सकती है। 

सुब्रह्मण्यम ने कहा, "हम नुकसान में हैं... 50 प्रतिशत टैरिफ एक बहुत बड़ा लागत कारक है... इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है। लोगों को उम्मीद है कि अगर नवंबर तक व्यापार समझौता हो जाता है, तो कोई व्यवधान नहीं होगा।"

इस वर्ष फरवरी में दोनों देशों के नेताओं ने अधिकारियों को प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत करने का निर्देश दिया था। समझौते के पहले चरण को 2025 की अक्तूबर-नवंबर तक पूरा करने की योजना थी। अब तक पांच दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 191 अरब डॉलर से दोगुना से भी अधिक बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।

अमेरिका 2024-25 में लगातार चौथे वर्ष भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना रहेगा, जिसका द्विपक्षीय व्यापार 131.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर (86.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात) होगा। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत का व्यापार घाटा प्रबंधनीय है, लेकिन असंतुलित है। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र में मध्यस्थ मौजूद नहीं हैं, लेकिन भारत को किसी भी क्षेत्र को संरक्षण देना चाहिए। चीन से निवेश पर प्रतिबंध हटाने के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जहां तक चीन से आयात का सवाल है, चीन भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।


उन्होंने कहा, "यदि आप चीन को अधिक उत्पाद नहीं बेच सकते, तो यह व्यर्थ है...यदि आप (भारत) प्रतिस्पर्धी हैं, तो वे अधिक उत्पाद खरीदेंगे।" नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि भारत की नई विनिर्माण नीति क्लस्टरों पर केंद्रित होगी। यह एक विश्व स्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र होगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश के विनिर्माण क्षेत्र में विविधता लाने की जरूरत है।

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