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एमएसएमई: मिला 9.5 लाख करोड़ का कर्ज, संसदीय समिति ने कहा- कोई फायदा नहीं
Thu, 29 Jul 2021 07:33 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली/मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 29 Jul 2021 07:33 AM IST
सार
- संसद की स्थायी समिति ने दावा किया है कि सुधारों के लिए मिले आर्थिक पैकेज से छोटे-मझोले उद्यमों को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा है
- ट्रांस सिबिल ने कहा कि मार्च, 2021 तक एमएसएमई क्षेत्र का एनपीए 12.6% पहुंच गया है, दिसंबर, 2020 में यह 12% था
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लघु उद्योग
- फोटो : PTI
विस्तार
महामारी के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को उबारने के लिए 2020-21 के दौरान 9.5 लाख करोड़ के कर्ज दिए गए। यह 2019-20 में मिले 6.8 लाख करोड़ से 40% ज्यादा है। वहीं, संसद की स्थायी समिति ने दावा किया है कि सुधारों के लिए मिले आर्थिक पैकेज से छोटे-मझोले उद्यमों को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा है।
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सिडबी और ट्रांसयूनियन सिबिल की ‘एमएसएमई पल्स’ रिपोर्ट के अनुसार, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) जैसे प्रयासों से एमएसएमई के कर्ज में भारी वृदि्ध हुई। देश के वाणिज्यिक क्षेत्र को मार्च, 2021 तक मिला कुल कर्ज 0.6% बढ़कर 74.36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें एमएसएमई के लोन बुक की हिस्सेदारी 20.21 लाख करोड़ रही, जो एक साल पहले से 6.6% ज्यादा है। महामारी की पहली लहर में कारोबारी कर्ज की मांग में 76% गिरावट रही थी, लेकिन क्रेडिट गारंटी योजना के बाद जबरदस्त इजाफा हुआ। वहीं, उद्योग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, आर्थिक पैकेज में कर्ज के जरिये मदद दी गई जो एमएसएमई को तत्काल राहत नहीं दे सके।
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12.6 फीसदी पहुंचा एमएसएमई का एनपीए: ट्रांस सिबिल
ट्रांस सिबिल ने कहा कि मार्च, 2021 तक एमएसएमई क्षेत्र का एनपीए 12.6% पहुंच गया है। दिसंबर, 2020 में यह 12% रहा था। हालांकि, पिछले साल से तुलना करें तो ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है, क्योंकि तक एनपीए 12.5% रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कर्जदाता ज्यादा जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। बावजूद इसके मार्च तक एमएसएमई को मिलने वाला कर्ज कोरोना पूर्व स्तर से 5% ज्यादा पहुंच गया है।
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क्रेडिट गारंटी योजना की सफलता को बयां करते हैं आंकड़े : सिडबी अध्यक्ष
सिडबी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिवसुब्रमण्यन रमन ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में एमएसएमई को दिए गए कर्ज के आंकड़े क्रेडिट लाइन गारंटी योजना की सफलता बयां करते हैं। इस योजना से न सिर्फ एमएसएमई के कर्ज में 40% बढ़ोतरी देखने को मिली है, बल्कि छोटे उद्योगों के बीच कारोबार की धारणा में भी सुधार हुआ है। रमन ने कहा कि कर्ज के आंकड़े बताते हैं कि बैंकों की नए ग्राहकों (एमएसएमई) को ऋण देने की दर कोरोना पूर्व स्तर पर पहुंच गई है। मौजूदा ग्राहकों के कर्ज में भी उछाल आया है। खासतौर से हेल्थकेयर, ट्रैवेल एवं पर्यटन उद्योग को दी गई मदद से मांग बढ़ने की उम्मीद है।
तत्काल राहत के लिए कर्ज के बजाय नकद पैकेज लाए केंद्र
संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था और खासतौर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को भारी नुकसान पहुंचा है। अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार की ओर से घोषित राहत पैकेज पर्याप्त नहीं है। इसमें अपनाए गए तरीके कर्ज की पेशकश और दीर्घकालिक उपायों के संबंध में अधिक थे। तत्काल राहत के तौर पर मांग पैदा करने के लिए नकदी प्रवाह में सुधार जैसे उपायों पर कम जोर दिया गया।
समिति ने सिफारिश की है कि छोटे उद्योगों का अस्तित्व बचाने, मांग, निवेश, निर्यात और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए तत्काल एक बड़ा आर्थिक पैकेज लाना चाहिए। इसमें एमएसएमई को फौरी तौर नकदी सहायता देना भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न एमएसएमई संगठनों ने समिति को बताया है कि व्यापार में तेज गिरावट की वजह से ज्यादातर छोटे उद्योग नकदी संकट से गुजर रहे हैं। बैंकों से कार्यशील पूंजी निकालने में आ रही मुश्किलों की वजह से करीब 25 फीसदी एमएसएमई के कर्ज पर जोखिम बना हुआ है आैर वे इसके भुगतान में चूक कर सकते हैं। जीडीपी आैर रोजगार में बड़ी भूमिका निभ्ााने वाले एमएसएमई क्षेत्र को उबारने के लिए व्यापक सर्वे और विश्लेषण की जरूरत है। ताकि, इसके मुताबिक राहत पैकेज लाया जाए तो वास्तव में मददगार साबित हो।
समिति के प्रमुख सुझाव
- एमएसएमई क्षेत्र के 22,316 करोड़ रुपये के बकाए का 45 दिन में भुगतान कराएं।
- क्रेडिट गारंटी योजना की 50 फीसदी राशि एमएसएमई को मिली, इसे और बढ़ाया जाए।
- 3-4 फीसदी मामूली ब्याज पर ही क्षेत्र को कर्ज मुहैया कराएं, भुगतान का समय बढ़ाएं।
- एमएसएमई के लिए बकाया अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन किया जाए।