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MPC Minutes: ब्याज दरों में कटौती पर गवर्नर व सदस्यों का कैसा था रुख? एमपीसी बैठक के विवरण से आया सामने

Fri, 21 Feb 2025 06:39 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 21 Feb 2025 06:39 PM IST
सार

MPC Minutes: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने हुई मौद्रिक नीति समिति में ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में अपना मत दिया था। बैठक के दौरान उन्होंने मुद्रास्फीति के केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का हवाला देते हुए कहा था कि इस समय ब्याज दरों में कटौती एक उचित मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया है। 

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MPC minutes: Rate cut appropriate monetary policy response, opined RBI Guv
संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने हुई मौद्रिक नीति समिति में ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में अपना मत दियाा था। बैठक के दौरान उन्होंने मुद्रास्फीति के केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का हवाला देते हुए कहा था कि इस समय ब्याज दरों में कटौती एक उचित मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया है। शुक्रवार को जारी एमपीसी की बैठक के विवरण में यह जानकारी दी गई है। 

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पांच वर्षों के बाद आरबीआई ने रेपो दरों में की है 25 आधार अंकों की कटौती

मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के पांच अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अल्पकालिक उधार दर (रेपो रेट) में 25 आधार अंकों की कटौती करके इसे 6.25 प्रतिशत करने के पक्ष में मतदान किया था। आरबीआई ने 5 से 7 फरवरी तक हुई अपनी बैठक में पांच साल के अंतराल के बाद ब्याज दरों में कटौती की। आरबीआई की मिनट्स के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा, "वृहद आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए, जब मुद्रास्फीति के लक्ष्य के अनुरूप रहने की उम्मीद है, और यह मानते हुए कि मौद्रिक नीति दूरदर्शी है, मैं वर्तमान स्थिति में कम नीति दर को अधिक उपयुक्त मानता हूं।"

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अपनी पहली एमपीसी बैठक की अध्यक्षता करते हुए आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा था कि वैश्विक वित्तीय बाजारों और व्यापार नीति के मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितताओं के साथ-साथ प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के जारी रहने के जोखिम से मुद्रास्फीति और विकास के दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा हो रहा है। हालांकि फरवरी महीने की एमपीसी बैठक के बाद केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में कमी कर दी थी, लेकिन मौद्रिक नीति पर अपना रुख रखा था।

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महंगाई दर में राहत के बाद केंद्रीय बैंक ने लिया ब्याज दरों में कटौती का फैसला

मल्होत्रा ने कहा, "उभरते वृहद आर्थिक परिवेश के अनुरूप प्रतिक्रिया करने में लचीलापन मिलेगा। इस तार्किक मार्ग को अपनाने से मौद्रिक नीति अपना दायित्व पूरा करने में सक्षम होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था के सतत विकास में अपनी भूमिका निभा सकेगी।" अक्तूबर में आरबीआई की ओर से महंगाई दर लक्ष्य सीमा के ऊपर जाने के बाद, बीते महीनों में मुख्य मुद्रास्फीति में कमी आई और जनवरी में यह पांच महीने के निम्नतम स्तर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।


एमपीसी के सदस्य और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने बैठक के दौरान कहा कि वर्तमान समय में, मुख्य मुद्रास्फीति के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ, नीतिगत रेपो दर में कटौती के जरिए विकास से संबंधित चिंताओं को दूर करने की अधिक गुंजाइश है।

राव ने कहा, "बजट में घोषित राजकोषीय उपायों के साथ इस मौद्रिक नीति उपाय से समग्र मांग की स्थिति को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, सरकार ने राजकोषीय समेकन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जिससे मध्यम अवधि की मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करने में मदद मिलेगी।"

आरबीआई के कार्यकारी निदेशक और पैनल के सदस्य राजीव रंजन ने कहा कि आरबीआई ने जिस अनुक्रम पथ का अनुसरण किया है, उसके अनुरूप फरवरी 2025 में नीतिगत दर में कटौती सबसे तर्कसंगत और उपयुक्त अगला कदम है, क्योंकि अब हमें अवस्फीति पथ पर अधिक विश्वास है।

मिनट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, "इस पूर्वानुमान के अनुरूप, हमने बेहतर संचरण के लिए पर्याप्त तरलता डालकर बाजार को भी तैयार किया है। आधारभूत अनुमानों से पता चलता है कि 2025-26 के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति औसतन 4.2 प्रतिशत रहेगी।"

एमपीसी के बाहरी सदस्यों ने भी रेपो दर में कटौती के पक्ष में किया मतदान

एमपीसी के बाहरी सदस्यों- नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और राम सिंह- ने भी रेपो दर में कटौती के पक्ष में मतदान किया था। नागेश कुमार ने चिंता जताई थी कि चीन में अतिरिक्त क्षमता की डंपिंग हो सकती है, जिससे उनकी भारी जेबों और पश्चिमी बाजारों तक उनकी पहुंच पर संकट आ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस्पात सहित कुछ विनिर्माण क्षेत्रों पर दबाव महसूस होने लगा है (संभवतः यही नकारात्मक वृद्धि का कारण है), जबकि वस्त्र और चमड़े के सामान जैसे श्रम-प्रधान उपभोक्ता क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है। नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि एफडीआई प्रवाह धीमा रहा है, एफडीआई और एफपीआई दोनों विदेशी निवेशक वापस लौट रहे हैं, जिससे शुद्ध रूप से बहुत कम निवेश बचा है।



कुमार ने कहा, "इसलिए, विकास को समर्थन देने की बात पर अधिक जोर नहीं दिया जा सकता।" एमपीसी के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि मुद्रास्फीति में गिरावट को देखते हुए, ब्याज दरों में कटौती "आर्थिक चक्र के इस बिंदु पर उचित नीतिगत प्रतिक्रिया" है। भट्टाचार्य ने तटस्थ मौद्रिक नीति रुख जारी रखने के लिए भी मतदान किया। राम सिंह ने कहा कि केंद्रीय बजट 2025 ने मांग को बढ़ावा दिया है। सिंह ने कहा, "हालांकि, जब तक ब्याज दरों में तत्काल कमी नहीं की जाती, मांग बढ़ने से निजी पूंजीगत व्यय में वृद्धि नहीं होगी।" एमपीसी की अगली बैठक 7 से 9 अप्रैल, 2025 के दौरान निर्धारित है।

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