फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Living Will is helpful in mental disability know everything here

Living Will: मानसिक विकलांगता में मददगार है लिविंग विल; कैसे की जाती है तैयार और कहां आती है काम, जानें सबकुछ

Mon, 11 Dec 2023 06:37 AM IST
जलज मिश्रा नारायण कृष्णमूर्ति, नई दिल्ली
नारायण कृष्णमूर्ति, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 11 Dec 2023 06:37 AM IST
सार

मानसिक विकलांगता का मतलब है कि एक स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति अचानक कोई भी निर्णय लेने की क्षमता खो सकता है। पिछले सप्ताह मेरे मित्र रमेश की 80 वर्षीय मां अचानक गिर गईं। इससे उनके चेहरे का बायां हिस्सा आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया।

विज्ञापन
Living Will is helpful in mental disability know everything here
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना से शायद ही कोई व्यक्ति हो, जो नहीं प्रभावित हुआ है। एक ऐसी बीमारी, जिसका असर हर किसी के परिवार, दोस्तों या करीबियों में एक मौत के रूप में दिखा। हालांकि, हम कभी-कभी परिवार के सदस्यों पर पड़ने वाले मृत्यु के प्रभाव के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं। लेकिन, अब हमें मृत्यु से भी बदतर मानसिक विकलांगता के बारे में भी सोचने की जरूरत है।
विज्ञापन


मानसिक विकलांगता का मतलब है कि एक स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति अचानक कोई भी निर्णय लेने की क्षमता खो सकता है। पिछले सप्ताह मेरे मित्र रमेश की 80 वर्षीय मां अचानक गिर गईं। इससे उनके चेहरे का बायां हिस्सा आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हो गया। अब उन्हें बोलने में परेशानी हो रही है। उनका दायरा सीमित हो गया है। वह अपने पिता के कारोबार के साझेदारों में से एक हैं। निदेशक और हस्ताक्षरकर्ता भी हैं। उनकी इस स्थिति से उनके पिता को कारोबार के भविष्य के बारे में चिंता हो रही है। डॉक्टरों ने अभी नहीं बताया है कि उन्हें ठीक होने में कितना समय लगेगा।
विज्ञापन


ऐसे मामलों में काम आता है लिविंग विल या एएमडी
उम्र बढ़ने के साथ विकलांगता का अनुमान शायद ही कभी लगाया जाता है। ऐसे उदाहरण हैं, जब उम्र बढ़ने के साथ लोगों को अल्जाइमर या पार्किंसंस या डिमेंशिया हो जाता है। ये बीमारियां बुजुर्गों की सोच को प्रभावित करती हैं। इनका इलाज नहीं है। इसका मतलब है कि लोग स्वयं निर्णय लेने की क्षमता के बिना लंबा जीवन जी सकते हैं। ऐसे मामलों में इस तरह के लोगों के फाइनेंस या उनके इलाज का क्या होता है? इस स्थिति से निपटने के लिए एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव्स (एएमडी) या लिविंग विल काम आता है। यह एक ऐसा दस्तावेज है, जो उन परिस्थितियों में काम आता है जिसमें लोग निर्णय लेने का अधिकार दूसरों को दे देते हैं। अगर रमेश की मां ने एएमडी बनाया होता, तो उनके पिता की कुछ चिंताओं का समाधान हो जाता। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ज्यादातर एएमडी मेडिकल निर्णयों से जुड़े हैं, लेकिन इसमें कुछ गैर-चिकित्सा प्राथमिकताओं को भी शामिल किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट ने बनाया आसान, बुजुर्गों की भलाई पर ध्यान
इस साल की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने एएमडी बनाना और उस तक पहुंच को आसान बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ न्यायिक मजिस्ट्रेटों को अधिकृत करने के बजाय राजपत्रित अधिकारियों को भी ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर का अधिकार दिया है। यह दस्तावेज सुनिश्चित करता है कि बुजुर्गों की भलाई पर ध्यान दिया जाए। इसमें कोई यह निर्देश दे सकता है कि अगर व्यक्ति को बहुत अधिक दर्द या परेशानी हो और इसमें सुधार नहीं हो रहा है तो उसके इलाज पर बहुत अधिक जोर न दिया जाए। ऐसा प्रावधान बुजुर्गों या किसी भी व्यक्ति को जीवन सपोर्ट प्रणाली पर रहने वाले व्यक्ति में बदलने के बजाय जीवन की गरिमा बनाए रखने की मंजूरी देता है।

इलाज के प्रति इच्छाओं का ध्यान
लिविंग विल कैंसर के मामलों में अग्रिम निर्देश की तरह है, जहां बीमारी के अंतिम चरण में कोई व्यक्ति इलाज कराने की इच्छा नहीं कर सकता है। दस्तावेज आपको और आपके आश्रितों को यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि इलाज के प्रति आपकी इच्छाओं का ध्यान रखा जाए। आपको ऐसी स्थिति में न रहना पड़े, जो मौत से भी बदतर हो।

जानिये...कौन बना सकता है लिविंग विल
  1. लिविंग विल बनाने वाले व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा होनी चाहिए। वह मानसिक रूप से स्वस्थ भी हो।
  2. इस विल को बनाने के लिए परिवार के एक करीबी सदस्य की भी आवश्यकता होती है।
  3. फिर दस्तावेज को बनाने वाले और दो स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर के साथ सत्यापित किया जाना चाहिए।
  4. इसके अलावा, एक नोटरी या राजपत्रित अधिकारी का भी काउंटरसाइन होना चाहिए। नोटरी या राजपत्रित अधिकारी को यह सत्यापित करना होगा कि दस्तावेज बिना किसी दबाव के बनाया गया है।
  5. कुल मिलाकर, लिविंग विल बनाने वाला व्यक्ति किसी मजबूरी के तहत ऐसा नहीं कर रहा है।
आधिकारिक रिकॉर्ड में प्रतियां रखनी जरूरी
लिविंग विल की प्रतियां आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए अभिभावक, पारिवारिक चिकित्सक (अगर कोई हो) और नामित स्थानीय सरकारी अधिकारी या अपने नगर निगम के साथ साझा की जानी चाहिए। निष्पादक (एक्जिक्यूटर)...अपनी बीमा कंपनी के जरिये लिविंग विल को अपने इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड में भी शामिल कर सकता है। अस्पताल में भर्ती होने पर यह दस्तावेज काम आता है। तब डॉक्टर इलाज के लिए लंबा समय नहीं लगाते हैं। एएमडी कानूनी है। अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्य देखभाल संबंधी निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है तो वह उपचार व देखभाल के लिए अपनी प्राथमिकताएं बताता है। उदाहरण के लिए, गंभीर बीमारी या अक्षमता के मामलों में यह स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं व करीबियों को चिकित्सा आदेशों और जीवन को बनाए रखने वाले उपचारों के प्रकार के बारे में मार्गदर्शन में काम आ सकता है, जो विशिष्ट परिस्थितियों में चाहते हैं या नहीं चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed