पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने से सरकार को होगा इतना फायदा
केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में आठ रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि करने का अधिकार हासिल कर लिया है।
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भविष्य में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में आठ रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा सकती है। लेकिन इस बीच सवाल ये है कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी में इजाफा क्यों करना चाहती है।
कोरोना वायरस पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। भारत में इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके मद्देनजर भारत के 30 राज्यों में पूरी तरह लॉकडाउन है। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे। सड़कों पर काफी कम गाड़ियां दिखाई दे रही हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की मांग पर पड़ा है। कच्चे तेल के भाव 30 डॉलर से नीचे होने के बावजूद घरेलू ऑइल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल के भाव कम नहीं कर ही हैं।
इसलिए बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी
एक्साइज ड्यूटी एक रुपये प्रति लीटर बढ़ने से सरकार को सालाना करीब 13000 से 14000 करोड़ रुपये का फायदा होगा। उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी का नतीजा सामान्य तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के रूप में सामने आता है लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय दरों में गिरावट के हिसाब से समायोजित हो जाएगी और कीमतों में इजाफा नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में गिरावट से होने वाले लाभ को बढ़ाने की कोशिश में सरकार ने यह फैसला लिया है। सरकार आने वाले दिनों में कभी भी पेट्रोल, डीजल पर आठ रुपये के दायरे में उत्पाद शुलक में वृद्धि कर सकती है।
इतना हो सकता है उत्पाद शुल्क
इस संदर्भ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2020 में संशोधन पेश किए जिसमें इन ईंधनों पर भविष्य में एक सीमा तक विशेष उत्पाद शुल्क की दर बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था। सदन ने विधेय को बिना चर्चा के पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद सरकार पेट्रोल पर अतिरिक्त विशेष उत्पाद शुल्क को प्रति लीटर 10 रुपये से बढ़ाकर 18 रुपये और डीजल पर चार रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये प्रति लीटर तक कर सकती है।
14 मार्च को भी की गई थी घोषणा
सरकार ने इससे पहले 14 मार्च को दोनों ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर वृद्धि की घोषणा की थी। इस वृद्धि से सालाना आधार पर सरकार को 39,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्रापत हो सकता है। इस शुल्क वृद्धि में दो रुपये विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क मद में दो रुपये और सड़क एवं अवसंरचना उपकर की मद में एक रुपये प्रति लीटर शुल्क बढ़ाया गया। कुल मिलाकर तीन रुपये प्रति लीटर तक शुल्क बढ़ाया गया।
सरकार द्वारा 14 मार्च को की गई वृद्धि के बाद विशेष उत्पाद शुल्क इसके लिए कानून में दी गई अधिकतम सीमा तक पहुंचा गया था। यह सीमा पेट्रोल के मामले में 10 रुपये और डीजल के मामले में चार रुपये प्रति लीटर थी।
सरकार ने अब वित्त विधेयक की आठवीं अनुसूची में संशोधन करते हुए इस सीमा को पेट्रोल के मामले में बढ़ाकर 18 रुपये और डीजल के मामले में 12 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यह संशोधन सरकार को भविष्य में शुल्क बढ़ाने के लिए कानूनी प्रावधान के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। फिलहाल इस समय पेट्रोल, डीजल पर इस शुल्क में कोई वृद्धि नहीं की गई है। सरकार भविष्य में जरूरत पड़ने पर यह वृद्धि कर सकती है।