सावजी ढोलकियाः कर्ज लेकर शुरू किया था हीरा कारोबार, आज 6 हजार करोड़ का टर्नओवर
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सूरत की डायमंड कारोबारी कंपनी श्री हरे कृष्णा एक्सपोर्ट को कौन नहीं जानता है। दिवाली और होली पर अपने कर्मचारियों को कार और फ्लैट गिफ्ट देकर चर्चा में आए इस कंपनी के मालिक सावजी ढोलकिया की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है। आप भी जाने उनकी कहानीः-
सावजीभाई का बचपन
सावजी भाई ढोलकिया का जन्म अमरेली जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। ढोलकिया का मन पढ़ने में न लग रहा था तो यह 13 वर्ष की उम्र में ही सूरत भाग गए और एक छोटी से फैक्ट्री में काम करने लगे। सूरत से पांच-छह महीने में लौटकर जब ये घर पहुंचे तो इनके पिता ने पढ़ने के लिए समझाया लेकिन इन्हें पढ़ाई से डर लगता था। जिससे यह फिर सूरत चले गए और इसी तरह दो-तीन बार किया।
इसी बीच ढोलकिया की मां उन्हें पास बुलाकर समझाया कि सभी के बच्चे काम करते हैं, पूजा करते हैं तो वह भी कुछ काम करे और अच्छा आदमी बने। ढोलकिया बताते हैं मां उन्हें अक्सर समझाती और इमोशनली ब्लैकमेल करती थी। इसके बाद एक दिन उन्होंने ठान लिया कि अब अच्छा आदमी बनना है।
ढोलकिया के अनुसार, एक दिन स्वामी नारायण संप्रदाय के एक साधु के पास गए। उनका परिवार पिछली कई पीढ़ियों ने उनका स्वामी नारायण सम्प्रदाय का अनुयाई है। उन्होंने साधु से पूछा कि वह उनका जीवन खुशहाल बनाने के लिए कुछ उपाए बताएं। इस पर साधु ने सकाम भक्ति के तहत 108 नामों का एक मंत्र बताया और उसे 11 लाख बार जाप करने के लिए कहा और कहा कि इतना करने के बाद कोई भी कुछ करना चाहे तो कर सकता है।
साधु के इस उपाय को करने के बाद ढोलकिया के अंदर एक बड़ा आत्म विश्वास जागा कि वह अब कुछ भी कर सकते हैं। इसी ध्येय के साथ अब वह फिर से नौकरी करने सूरत के चले आए।
ढोलकिया की पहली नौकरी
ढोलकिया ने बताया कि सूरत की एक फैक्ट्री में वह 179 रुपये प्रति माह पर नौकरी करने लगे जिसमें खाने-पीने में 140 रुपए खर्च करने के बाद 39 रुपये बचा करते थे। इसी फैक्ट्री में दिनेश नाम का उनका दोस्त था जिसकी सैलरी उस वक्त 1200 रुपये थी।
उन्होंने अब अपने दोस्त जैसा काम करके ज्यादा पैसे कमाने की सोची तो तीन-चार महीने के प्रयास से वह अपने दोस्त के विभाग में पहुंच गए। वहां कुछ दिनों तक काम सीखा और फिर अपने दोस्त से ज्यादा सैलरी उठाने लगे और उनका यह काम था हीरा घिसने का।
सावजी भाई बताते हैं कि उन्होंने करीब 10 साल तक हीरा घिसने का काम किया और इसके बारे में काफी अनुभव हुआ तो अपने घर में कुछ दोस्तों के साथ हीरा घिसने का काम शुरू किया जो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
1991 में एक करोड़ की हुई कंपनी
ढोलकिया आगे बताते हैं कि कारोबार आगे बढ़ाना था तो कंपनी बनाना और उसकी मार्केटिंग करना भी जरूरी था, जिसके लिए वह मुबई पहुंच गए। उनके अनुसार मुबई में उन्होंने एक बिजनेस सलाहकार की सेवा ली और फिर कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराके मार्केटिंग का काम शुरू किया।
ढोलकिया की हरे कृष्णा डायमंड नाम की कंपनी का कारोबार 1991 में मात्र एक करोड़ का था तो मार्च 2014 तक 2100 करोड़ तक पहुंच गया है। उनके अनुसार इस वर्ष के अंत तक डायमंड एक्पोर्ट का लक्ष्य 2800 करोड़ का रखा गया है जो आसानी से पूरा हो जाएगा।
ढोलकिया के अनुसार उनकी कंपनी अभी 50 देशों के लिए ही हीरा सप्लाई करती है। दुनिया के 200 देश अभी बाकी हैं। हरे कृष्णा डायमंड के दुनिया के सात देशों में खुद के आउटलेट्स हैं। इसके अलावा दुनिया भर के 5000 हजार शोरूमों में इनका हीरा उपलब्ध है। हाल ही में ढोलकिया ने कर्मचारियों को मंहगे तोहफे दिए हैं लेकिन कर्मचारियों से काम कराने का उनका नजरिया भी अलग है।
कर्मचारियों से कैसे काम लेते हैं ढोलकिया?
कर्मचारियों से काम लेने के बारे में ढोलकिया बताते हैं कि उनकी कंपनी में कोई भी एमबीए, बीबीए या कोई डिप्लोमाधारी को उनके यहां जरूरी वेतन के साथ पांच साल तक ट्रेनिंग पर रखा जाता है। इस दौरान कर्मचारियों को इस स्तर का ज्ञान दिया जाता है कि वह कंपनी चला सके।
सावजी भाई ढोलकिया बताते हैं कि उनके पास 35 साल काम करने का अनुभव है और इसी के बराबर वह अपने हर कर्मचारी को पांच साल में सिखा देते हैं ताकि वह उनसे ज्यादा अच्छा काम कर सके। इतना ही नहीं वह कर्मचारियों को लेके उनका नजरिया भी अलग है।
उनका कहना है कि कर्मचारी से ऐसे काम लिया जाए, ऐसी सैलरी दी जाए जिससे की वह खुशी के साथ काम करे। उनका कहना है किसी कर्मचारी पर उनका ध्यान खुश रखने पर केंद्रित होता है और कर्मचारियों का ध्यान कंपनी को प्रॉफिट दिलाना।
ढोलकिया अपनी मां की इस बात को सबसे ज्यादा जोर देकर कहते हैं कि उनकी मां का कहना है अच्छा आदमी बनना है और अच्छा आदमी कैसा होता है? वह हमेशा अपने कर्मचारियों यही अनुभव कराने की कोशिश करते हैं।
इतना ही नहीं वह कहते हैं उनकी कोशिश होती है कि वह अपने कर्मचारी से ऐसा व्यवहार करें जैसे की अपने बेटे से करते हैं और इसकी जरा भी परवाह नहीं करते कि वह काम सीख जाएगा तो अपना बिजनेस शुरू कर देगा।
71 देशों में हीरे का कारोबार फैला हुआ है
हरे कृष्णा एक्सपोर्ट का दुनिया के 71 देशों में हीरे का कारोबार फैला हुआ है। हरे कृष्णा एक्सपोर्ट ने अपने गोल्डन जुबली अवसर पर कर्मचारियों को बोनस देन के लिए 51 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सावजी ढोलकिया 2011 से ही अपने कर्मचारियों को इसी तरह का खास दिवाली बोनस देते रहे हैं। पिछले वर्ष कर्मचारियों को दिवाली बोनस में उन्होंने 491 कारें और 200 फ्लैट दिए थे।
अपने चाचा से कर्ज लेकर हीरे का कारोबार शुरू करने वाले सावजी ढोलकिया गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव के रहने वाले हैं। जी-तोड़ मेहनत करने के बाद वह कंपनी को ऊंचाईयों तक ले गए हैं।
सावजी भाई ढोलकिया की हरे कृष्ण डायमंड एक्सपोर्ट कंपनी में करीबन 5500 कमर्चारी काम करते हैं। देश या दुनिया की किसी भी प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कमर्चारियों को उनका मालिक या बॉस शायद ही कोई ऐसी गिफ्ट देता होगा जैसे महंगे गिफ्ट सूरत के हीरा कारोबारी सावजी भाई ढ़ोलकिया अपने कमर्चारियों को देते आये हैं।