झटकाः महंगा हुआ NPS में निवेश करना, अब देना होगा ज्यादा पैसा
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नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने वालों के अब ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा। इस स्कीम को रेग्यूलेट करने वाली पेंशन फंड रेग्यूलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज लगाने का फैसला किया है।
2004 में शुरू हुई थी पेंशन स्कीम
इस स्कीम को सरकार ने 2004 में शुरू किया था। सरकार ने इसके लिए एक जनवरी 2004 के बाद सरकारी नौकरी शुरू करने वाले लोगों को इसमें निवेश का मौका दिया था। 2009 से आम जनता को इस स्कीम में निवेश करने की अनुमति दी गई थी। अब एनपीएस ट्रस्ट ने फैसला लिया है कि खातों, फंड और असेट के रखरखाव के लिए लोगों से चार्ज वसूला जाएगा।
एक अगस्त से लगेगा चार्ज
एनपीएस ट्रस्ट के जनरल मैनेजर अखिलेश कुमार ने सभी अंशधारकों को सूचित किया है कि रोजना आधार पर सालाना 0.005 फीसदी चार्ज लिया जाएगा। हालांकि इसके बावजूद भी यह ईएलएसएस और यूलिप से काफी सस्ता होगा।
क्या है नेशनल पेंशन स्कीम
नेशनल पेंशन स्कीम या एनपीएस एक रिटायरमेंट सेविंग अकाउंट है, जिसे भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 को लांच किया था। इस योजना के तहत निजी कंपनियों में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच है इस योजना का लाभ उठा सकता है।
एनपीएस के लिए निजी बैंकों को बनाया पीओपी
सरकार एनपीएस का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे इसके लिए देशभर में पॉइंट ऑफ प्रजेंस बनाए हैं। यही नहीं इस एकाउंट को देश के लगभग सभी सरकारी और निजी बैंकों को पीओपी बनाया है, इसलिए किसी भी बैंक की नजदीकी ब्रांच में अकाउंट खुलवाया जा सकता है। इस योजना में दो तरह के अकाउंट होते हैं। टियर एक और दो और दोनों ही एकाउंट के लिए ग्राहकों को 12 अंकों का परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर दिया जाता है।
क्या है टियर एक और दो अकाउंट
टियर 1 अकाउंट
इस अकाउंट को खुलवाना अनिवार्य है। इस अकाउंट में जो भी रकम जमा की जाती है उसे रिटायरमेंट से पहले नहीं निकाला जा सकता है। यह सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है।
टियर 2 अकाउंट
इस अकाउंट में कोई भी अपना पैसा जमा कर सकता है यहां, कोई भी टियर एक अकाउंट होल्डर अपनी इच्छा से इसमें पैसा जमा कर सकता है और निकाल भी सकता है। इससे पैसे निकालने का एक समय पहले से ही निर्धारित है। यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।