पोर्टफोलियो की अस्थिरता घटाने में मददगार एसेट एलोकेशन, कोविड के बाद बाजार में क्या बदला?
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कोविड के बाद से शेयर बाजार ने मजबूत रिकवरी दिखाई है, लेकिन इस दौरान कई बार उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले। भू-राजनीतिक तनाव, एफआईआई की बिकवाली, ऊंची महंगाई और ब्याज दरें, आपसी व्यापारिक टैरिफ और कॉरपोरेट आय में सुस्ती जैसी चुनौतियां बनी रहीं। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा बाजार में मजबूत बना हुआ है। बॉन्ड मार्केट ने भी बीच-बीच में बेहतर रिटर्न दिए हैं। मिड-2022 के बाद से जी-सेक यील्ड्स में गिरावट आई और फरवरी 2023 से आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाना बंद कर दिया।
निवेशकों के सामने बाजार में क्या चुनौतियां?
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट एलोकेटर फंड के वनीश मैनी के अनुसार भले ही घरेलू खपत और विकास की रफ्तार लौट रही हो, लेकिन अमेरिकी व्यापारिक टैरिफ निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे माहौल में समझदारी से एसेट्स के बीच निवेश को संतुलित करना ही कुंजी है। लंबे समय में किसी भी पोर्टफोलियो का प्रदर्शन मुख्य रूप से उसकी एसेट एलोकेशन रणनीति पर निर्भर करता है।
इक्विटी और डेब्ट के अच्छे प्रदर्शन का अलग-अलग समय
मार्केट में हर एसेट क्लास के बेहतर प्रदर्शन का एक अलग समय होता है। इक्विटी आमतौर पर तब बेहतर प्रदर्शन करती है जब अर्थव्यवस्था और उद्योग विस्तार के दौर में होते हैं। डेब्ट या फिक्स्ड इनकम मार्केट तब बेहतर रिटर्न देती है जब अर्थव्यवस्था धीमी या संकुचन की स्थिति में होती है।
2006 से 2024 के बीच 19 वर्षों में, इक्विटी (Nifty 50 TRI) ने 16 साल अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि बाकी वर्षों में डेब्ट (CRISIL 10-year Gilt Index) ने बेहतर रिटर्न दिया। यानी इक्विटी और डेब्ट के बीच स्मार्ट एलोकेशन ही लंबी अवधि के स्थिर रिटर्न की कुंजी है।
सही समय पर एलोकेशन की दुविधा
निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती है सही समय पर पोर्टफोलियो का रीबैलेंसिंग करना और टैक्स ऑप्टिमाइजेशन संभालना। "लो पर खरीदो और हाई पर बेचो" जैसी रणनीति छोटे निवेशकों के लिए मुश्किल साबित होती है। सितंबर 2024, अक्टूबर 2021, सितंबर 2018 और सितंबर 2017 जैसे समय में जब इक्विटी वैल्यूएशन ऊंचे थे, तब डीआईआई के मजबूत इनफ्लो आए। वहीं कम वैल्यूएशन के समय पर आउटफ्लो देखने को मिले।
बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने का समाधान है एसेट एलोकेटर फंड्स
ऐसे में रिटेल निवेशकों के लिए एसेट एलोकेटर फंड्स (फंड ऑफ फंड्स) बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इन फंड्स के मैनेजर्स वैल्यूएशन, मार्केट डायनामिक्स और मैक्रो फैक्टर्स को देखते हुए इक्विटी, डेब्ट और गोल्ड के बीच सही एलोकेशन तय करते हैं।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट एलोकेटर फंड से क्या लाभ
ऐसा ही एक विकल्प है ICICI Prudential Asset Allocator Fund (FOF), जो इन-हाउस वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर इक्विटी, डेब्ट और गोल्ड म्यूचुअल फंड स्कीम्स/ETFs में निवेश करता है। 29 अगस्त 2025 तक इस फंड का 1-वर्षीय रिटर्न 6.21% रहा। तीन साल का CAGR 13.87% और पांच साल का CAGR 14.60% रहा। इस फंड पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स केवल 12.5% है। निवेशक कम से कम 24 महीने तक होल्डिंग रखकर इसका फायदा उठा सकते हैं।