Inflation: महंगाई रोकने के लिए कदम उठा रही सरकार, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- फिलहाल यह टॉलरेंस बैंड के भीतर
Inflation: भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर 2022 के औसतन 6.8 प्रतिशत से घटकर 2023 की इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत पर आ गई। खुदरा मुद्रास्फीति अब स्थिर है और 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड के भीतर है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्याज की कीमतों में अस्थिरता की जांच करने के लिए, सरकार ने इसके बफर आकार को 2020-21 के 1 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से बढ़ाकर 2023-24 में 7 एलएमटी कर दिया है।
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खुदरा महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों से राहत मिली है। खासकर जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति में कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बातें कही। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) गामा किरणों के माध्यम से प्याज के डी-ह्यूमिडिफिकेशन पर सरकार के साथ काम कर रहा है ताकि इसे लंबे समय तक खराब होने से बचाया जा सके।
उन्होंने कहा, "सरकार जल्द खराब होने वाले ऐसे सामानों की कमी के कारण पैदा होने वाली कठिनाइयों से अवगत है, जो भारत में नहीं उगाए जाते हैं। समिति समय-समय पर बैठती है और समीक्षा करती है, और इस दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम है कि मुद्रास्फीति अब टॉलरेंस बैंड के भीतर है।" भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल-दिसंबर 2022 के औसतन 6.8 प्रतिशत से घटकर 2023 की इसी अवधि में 5.5 प्रतिशत पर आ गई। खुदरा मुद्रास्फीति अब स्थिर है और 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड के भीतर है।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्याज की कीमतों में अस्थिरता का मुकाबला करने के लिए, सरकार ने इसके बफर स्टॉक को 2020-21 के 1 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से बढ़ाकर 2023-24 में 7 एलएमटी कर दिया है। 3 फरवरी, 2024 तक कुल 6.32 एलएमटी प्याज की खरीद की गई थी, और 3.96 एलएमटी ग्रेड-ए प्याज खुदरा बिक्री, ई-एनएएम नीलामी और थोक बिक्री के माध्यम से जारी किए गए।
खराब होने वाली वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार के लिए सरकार ने उठाए कदम
उन्होंने कहा, "वर्तमान में, कदम उठाए जा रहे हैं ताकि प्याज जैसी बहुत अधिक खराब होने वाली वस्तुओं के संरक्षण में सुधार किया जा सके," उन्होंने कहा, सरकार द्वारा बहुत सारे कदम उठाए गए हैं, विशेष रूप से ये कदम खराब होने वाले सामानों की आपूर्ति में सुधार के लिए उठाए गए हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत ने कैलेंडर वर्ष 2023 में 8.79 लाख मीट्रिक टन अरहर दाल और 15.14 लाख मीट्रिक टन मसूर दाल का आयात किया है। इसी तरह, देश ने अन्य दालों का आयात किया और उन्हें बाजार में जारी किया।
सरकार की पहल पर इस दौरान ब्रांडेड 'भारत दल' की भी बिक्री की गई जिसके तहत चना दाल के एक किलोग्राम का पैक 60 रुपये प्रति किलोग्राम और 30 किलोग्राम का पैक 55 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध कराया गया। 30 जनवरी, 2024 तक 2.97 लाख मीट्रिक टन चना पहले ही बेचा जा चुका है। रियायती मूल्य पर आने वाला भारत दल सभी खुदरा बाजारों में उपलब्ध है।
सीतारमण ने कहा, "चूंकि हम देश में पर्याप्त दलहन नहीं उगाते हैं और आपूर्ति में कमी के कारण, दालों की कीमतों में आमतौर पर उतार-चढ़ाव होता रहता है, इससे निपटने के लिए हम फसल अनुमानों का विश्लेषण करके आयात के लिए समझौता करना शुरू करते हैं।" उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी।
क्या है महंगाई केलिए निर्धारित टॉलरेंस बैंड?
खुदरा महंगाई दर पर नियंत्रण के लिए सरकार ने देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को एक लक्ष्य दिया है। यह लक्ष्य महंगाई दर को न्यूनतम 2% और अधिकतम 6% के बीच बनाए रखने का है। इसे ही टॉलरेंस बैंड कहा जाता है।