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चुनाव बाद महंगाई के लिए रहें तैयार, रसोई पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

Mon, 13 May 2019 03:03 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 13 May 2019 03:03 PM IST
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inflation might rise after 23 may, difficult for new government and common people

23 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद एक बार फिर से महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में आपकी रसोई पर इसका असर देखने को मिलेगा। सब्जियों से लेकर के दूध के दामों पर इसका असर देखने को मिलेगा। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में अगर वृद्धि होती है तो फिर पेट्रोल-डीजल के दामों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। 

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नई सरकार के लिए होगी मुसीबत

महंगाई को काबू में रखना नई सरकार के लिए सबसे कठिन कार्य होगा। देश के पश्चिम और दक्षिण के राज्य भीषण सूखे की चपेट में हैं। वहीं उत्तर भारत में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। फिलहाल कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनकी कीमतों में पिछले साल की तुलना में अभी भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 

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इनके चढ़े दाम

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में ज्वार, बाजरा, कपास, टमाटर, प्याज की कीमतों में इजाफा हो गया है। इसके अलावा पशुओं को खिलाया जाने वाला चारा भी काफी महंगा हो गया है। इससे दूध के दाम भी आगे चलकर बढ़ सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों ने अपने पशुओं को चारा खिलाना कम कर दिया है। 

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अमूल ब्रांड से दूध बेचने वाली कंपनी गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के प्रबंध निदेशक आर एस सोधी ने बताया कि इसकी वजह से भी दूध का उत्पादन कम हो गया है। हालांकि गर्मियों में पशु वैसे भी दूध देना कम कर देते हैं। ऐसे में अप्रैल से लेकर के जुलाई तक दूध का उत्पादन वैसे भी काफी कम हो जाता है। 

सब्जियों की कीमतों में उछाल

फिलहाल गर्मी की शुरुआत से ही सब्जियों की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। फिलहाल कोई भी सब्जी देश भर की थोक मंडियों में 25-30 रुपये प्रति किलो से कम नहीं है। केवल आलू के दाम ही सस्ते हैं। वहीं खुदरा व्यापारी भी सब्जियों को लोकेशन के हिसाब से 40-70 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रही हैं। 

अप्रैल में छह माह के उच्चतम पर महंगाई दर

अप्रैल में खुदरा महंगाई दर में इजाफा हुआ है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते पिछले महीने कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 2.92 फीसदी हो गई। मार्च में यह आंकड़ा 2.86 फीसदी और अप्रैल 2018 में 4.58 फीसदी था।

केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार फूड बास्केट की महंगाई दर अप्रैल में 1.1 फीसदी रही, जोकि मार्च में 0.3 फीसदी पर दर्ज की गई थी। रिजर्व बैंक अपनी मॉनिटरी पॉलिसी पर फैसला करने के दौरान खुदरा महंगाई के आंकड़ों को ध्यान में रखता है।

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