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Spice Ban Row: सिंगापुर और हांगकांग में भारतीय मसालों पर प्रतिबंध नहीं, केंद्रीय मंत्री ने सदन में बताया
Fri, 29 Nov 2024 06:14 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 29 Nov 2024 06:14 PM IST
सार
Spice Ban Row: केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन में एक लिखित उत्तर में बताया कि हालांकि, भारत से निर्यात किए गए मसालों के बैचों को पहले हांगकांग और सिंगापुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से स्वीकार्य सीमा से अधिक एथिलीन ऑक्साइड (ईटीओ) की मौजूदगी के कारण वापस मंगा लिया गया था।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि वाणिज्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों ने भारतीय मसालों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।
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जाधव ने सदन में एक लिखित उत्तर में बताया कि हालांकि, भारत से निर्यात किए गए मसालों के बैचों को पहले हांगकांग और सिंगापुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से स्वीकार्य सीमा से अधिक एथिलीन ऑक्साइड (ईटीओ) की मौजूदगी के कारण वापस मंगा लिया गया था।
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वाणिज्य मंत्रालय के मसाला बोर्ड ने इस मामले में कदम उठाए हैं। इनमें निर्यात किए जाने वाले मसालों की अनिवार्य शिपमेंट-पूर्व जांच और सभी स्तरों पर संभावित मिलावट को रोकने के लिए निर्यातकों की ओर से पालन किए जाने वाले व्यापक दिशानिर्देश जारी करना शामिल है।
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आयातक देश की अलग-अलग ईटीओ सीमाओं को पूरा करने के लिए कच्चे माल की खरीद, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण, परिवहन आदि से जुड़े विभिन्न कदम भी उठाए गए हैं। इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) देश भर में उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
जाधव के अनुसार, एफएसएसएआई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों व अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए मसालों सहित विभिन्न खाद्य उत्पादों की नियमित निगरानी, निरीक्षण और सैंपल कलेक्शन करता है, ताकि खाद्य सुरक्षा और मानक (एफएसएस) अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए विनियमों के तहत निर्धारित गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
मंत्री ने कहा कि जरूरी आवश्यकताओं पालन न करने की स्थिति में, एफएसएस अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दोषी खाद्य व्यवसाय संचालकों (एफबीओ) के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाती है।