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HIV Drugs: एड्स के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता, भारतीय फार्मा कंपनी की जेनेरिक दवाई को USFDA की मंजूरी
Fri, 24 Jan 2025 03:32 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 24 Jan 2025 03:32 PM IST
सार
ये दवाईयां ViiV हेल्थकेयर कंपनी की दवाई Triumeq PD टैबलेट्स का जेनेरिक संस्करण हैं। ये दवाईयां ल्यूपिन कंपनी के नागपुर स्थित प्लांट में बनाई जाएगी और मध्यम और कम आय वर्ग वाले देशों को इनकी आपूर्ति की जाएगी।
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एचआईवी मेडिसिन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एचआईवी संक्रमण और एड्स की बीमारी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। दरअसल अमेरिका की स्वास्थ्य नियामक संस्था ने एक भारतीय फार्मा कंपनी की जेनेरिक दवाई को इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। मंजूरी पाने वाली भारतीय फार्मा कंपनी ल्यूपिन ने बयान जारी कर कहा है कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (USFDA) ने ल्यूपिन की एचआईवी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाई को अभी अस्थायी तौर पर मंजूरी दी है।
कंपनी ने बयान जारी कर दी जानकारी
बयान में कहा गया है कि यह मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति के इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ के तहत दी गई है। मुंबई स्थित फार्मा कंपनी ल्यूपिन की जिन दवाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें Abacavir, Dolutegravir और Lamivudine टैबलेट्स शामिल हैं। ये दवाईयां ViiV हेल्थकेयर कंपनी की दवाई Triumeq PD टैबलेट्स का जेनेरिक संस्करण हैं। ये दवाईयां ल्यूपिन कंपनी के नागपुर स्थित प्लांट में बनाई जाएगी और मध्यम और कम आय वर्ग वाले देशों को इनकी आपूर्ति की जाएगी।
Abacavir (60 mg), Dolutegravir (5 mg), Lamivudine (30 mg) एक तय डोज वाली दवाईयां हैं, जिन्हें एड्स के मरीजों को हर दिन एक टैबलेट के तौर पर लेना होगा। ये दवाईयां एचआईवी-1 संक्रमण से पीड़ित तीन महीने तक के नवजातों के लिए कारगर हैं और इन नवजातों का वजन कम से कम छह किलो होना चाहिए। ल्यूपिन के कार्यकारी निदेशक और ग्लोबल सीएफओ एसबीयू रमेश स्वामीनाथन ने बयान जारी कर यूएफएफडीए की मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की।
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केरल में दुर्लभ रोग से ग्रस्त मरीजों की रजिस्ट्री और इलाज क्लीनिक शुरू
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में दुर्लभ रोग से ग्रस्त मरीजों की रजिस्ट्री इस साल से शुरू हो जाएगी। दुर्लभ रोग उपचार के विशेषज्ञों के लिए एक कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए जॉर्ज ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दुर्लभ रोगों की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस साल कोझिकोड में दुर्लभ रोग उपचार क्लिनिक की स्थापना की जाएगी। सरकार प्रभावित बच्चों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि, वर्तमान में, एसएमए (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) के उपचार से गुजरने वाले बच्चों के जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 'राज्य सरकार का लक्ष्य जन्मजात विकलांगताओं की पहचान करना और बच्चों के लिए विशेष उपचार सुनिश्चित करना है। केरल में फरवरी 2024 में, राज्य सरकार ने दुर्लभ बीमारियों के लिए केयर योजना शुरू की। 2024 में एस ए टी अस्पताल में दुर्लभ बीमारियों के लिए एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू की गई।' जॉर्ज ने कहा, 'वर्तमान में, 106 मरीजों को योजना के तहत महंगा इलाज मिल रहा है। शालभम परियोजना के माध्यम से, बच्चों में जन्मजात विकलांगता की पहचान की जाती है और उसका इलाज किया जाता है। हृदयम योजना, जो जन्मजात हृदय रोगों का पता लगाने और उनका इलाज करने पर केंद्रित है, इसके तहत 7,916 बच्चों को हृदय की सर्जरी कराई गई है।'
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कंपनी ने बयान जारी कर दी जानकारी
बयान में कहा गया है कि यह मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति के इमरजेंसी प्लान फॉर एड्स रिलीफ के तहत दी गई है। मुंबई स्थित फार्मा कंपनी ल्यूपिन की जिन दवाओं को मंजूरी दी गई है, उनमें Abacavir, Dolutegravir और Lamivudine टैबलेट्स शामिल हैं। ये दवाईयां ViiV हेल्थकेयर कंपनी की दवाई Triumeq PD टैबलेट्स का जेनेरिक संस्करण हैं। ये दवाईयां ल्यूपिन कंपनी के नागपुर स्थित प्लांट में बनाई जाएगी और मध्यम और कम आय वर्ग वाले देशों को इनकी आपूर्ति की जाएगी।
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Abacavir (60 mg), Dolutegravir (5 mg), Lamivudine (30 mg) एक तय डोज वाली दवाईयां हैं, जिन्हें एड्स के मरीजों को हर दिन एक टैबलेट के तौर पर लेना होगा। ये दवाईयां एचआईवी-1 संक्रमण से पीड़ित तीन महीने तक के नवजातों के लिए कारगर हैं और इन नवजातों का वजन कम से कम छह किलो होना चाहिए। ल्यूपिन के कार्यकारी निदेशक और ग्लोबल सीएफओ एसबीयू रमेश स्वामीनाथन ने बयान जारी कर यूएफएफडीए की मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की।
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केरल में दुर्लभ रोग से ग्रस्त मरीजों की रजिस्ट्री और इलाज क्लीनिक शुरू
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में दुर्लभ रोग से ग्रस्त मरीजों की रजिस्ट्री इस साल से शुरू हो जाएगी। दुर्लभ रोग उपचार के विशेषज्ञों के लिए एक कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद बोलते हुए जॉर्ज ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दुर्लभ रोगों की रोकथाम करना है। उन्होंने कहा कि इस साल कोझिकोड में दुर्लभ रोग उपचार क्लिनिक की स्थापना की जाएगी। सरकार प्रभावित बच्चों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि, वर्तमान में, एसएमए (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) के उपचार से गुजरने वाले बच्चों के जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 'राज्य सरकार का लक्ष्य जन्मजात विकलांगताओं की पहचान करना और बच्चों के लिए विशेष उपचार सुनिश्चित करना है। केरल में फरवरी 2024 में, राज्य सरकार ने दुर्लभ बीमारियों के लिए केयर योजना शुरू की। 2024 में एस ए टी अस्पताल में दुर्लभ बीमारियों के लिए एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी शुरू की गई।' जॉर्ज ने कहा, 'वर्तमान में, 106 मरीजों को योजना के तहत महंगा इलाज मिल रहा है। शालभम परियोजना के माध्यम से, बच्चों में जन्मजात विकलांगता की पहचान की जाती है और उसका इलाज किया जाता है। हृदयम योजना, जो जन्मजात हृदय रोगों का पता लगाने और उनका इलाज करने पर केंद्रित है, इसके तहत 7,916 बच्चों को हृदय की सर्जरी कराई गई है।'