H-1B वीजा पर US की सख्ती के बाद कम हुए भारतीय आवेदन, IT कंपनियों की दिलचस्पी में आई कमी
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अमेरिका में वीजा के लिए एच-1 बी वीजा के आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इस बार कड़े प्रावधानों की वजह से भारत की आईटी कंपनियां इसमें बेहद कम दिलचस्पी दिखा रही हैं। भारतीय कंपनियों ने अब तक काफी कम संख्या में एच-1 बी वीजा के लिए आवेदन किया है।
यह वीजा कुशल भारतीय पेशेवरों के बीच काफी लोकप्रिय है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस बार आवेदनों की सख्ती से जांच की जाएगी। इसलिए भारतीय कंपनियों की इसमें अधिक रुचि नहीं देखी जा रही है। सेन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल के संपादकीय बोर्ड ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में एच-1 बी वीजा की यह सबसे कठिन प्रक्रिया है।
बोर्ड ने कहा कि इस प्रक्रिया के चलते आवेदक और कंपनियां दोनों को ही दिक्कतें आ रही हैं। अमेरिकी सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आवेदन में जरा सी भी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाचार पत्र के मुताबिक भारतीय कंपनियों पर पहले आरोप लगते रहे हैं कि वह वीजा के लिए ढेर सारे आवेदन भेजती हैं, लेकिन इस बार सख्ती के चलते बेहद नाटकीय ढंग से आवेदनों की संख्या में कमी आई है।
पत्र ने लिखा कि जब कंपनियां कामगारों को उनकी पृष्ठभूमि के बजाय उनके कौशल के लिए चुनती हैं तब उनकी बढ़ती प्रतियोगिता अन्य व्यवसायों पर भी असर छोड़ती है। यही कारण है कि विदेशियों ने अमेरिकी कंपनियों में कूदने के लिए इस बार अनिच्छा प्रदर्शित की है।
हजारों भारतीयों को मिलती रही है इस वीजा से नौकरी
एच-1 बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है, जो विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है। देश की आईटी कंपनियों में यह वीजा काफी लोकप्रिय है और वे इस वीजा पर बहुत अधिक निर्भर हैं। हर साल भारत व चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों को इस वीजा के जरिए नौकरियां मिलतीं हैं। इस वीजा के तहत नौकरी का कार्यकाल इस साल 1 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।
अमेरिका में हुनरमंदों की कमी के चलते मिलता है वीजा
अमेरिका ऐसे विदेशी कर्मचारियों को एच-1 बी वीजा देता है, जो बेहद कुशल होते हैं, जबकि इस क्षेत्र में अमेरिका के भीतर ऐसे हुनरमंदों की कमी होती है। इसके अलावा अमेरिका के बैंकिंग, ट्रैवल और व्यावसायिक सेवाएं भारत के आईटी वर्कर्स पर निर्भर करती हैं, लेकिन इस बार वीजा के लिए सख्ती भारी पड़ती नजर आ रही है।