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Niti Aayog: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति जल्द, विनिर्माण बढ़ाने के लिए नवंबर के अंत तक शुरू होगा मिशन

Fri, 07 Nov 2025 04:29 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 07 Nov 2025 04:29 PM IST
सार

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर नवंबर के अंत तक कोई सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में बातचीत में कुछ अड़चनें आई थीं, लेकिन अब वार्ता को नए सिरे से आगे बढ़ाया जा रहा है।
 

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India-US trade deal agreed soon, mission to boost manufacturing to begin by November end
बीवीआर सुब्र - फोटो : ANI

विस्तार

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर नवंबर के अंत तक कोई सकारात्मक घोषणा हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत में चुनौतियां रही हैं, लेकिन अब दोनों देशों के बीच नए सिरे से कोशिशें जारी हैं। 

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सुब्रह्मण्यम ने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका के साथ चीजें थोड़ी मुश्किल रहीं, लेकिन अब बातचीत आगे बढ़ रही है। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक इस दिशा में कोई अच्छी खबर मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन नवंबर के अंत तक शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत लगातार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और वैश्विक कंपनियों की भारत में रुचि लगातार बढ़ रही है।
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भारत मजबूत स्थिति में खड़ा है

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जो आर्थिक निश्चितताएं थीं, वे अब समाप्त हो चुकी हैं। दुनिया एक ऐसे दौर में है जहां व्यापार और एफडीआई या तो स्थिर हैं या घट रहे हैं। ऐसे समय में भारत सबसे अलग और मजबूत स्थिति में खड़ा है।

सुब्रह्मण्यम के मुताबिक, “भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे चमकदार बिंदु है। हमारे पास आकार है, बाजार है और नवाचार की क्षमता है। यही हमारी ताकत है और यही कारण है कि दुनिया भारत की ओर आकर्षित होगी।”

उन्होंने कहा कि भारत अब किसी खेमे में शामिल होने की मजबूरी में नहीं है, बल्कि अन्य देश खुद भारत के साथ जुड़ने को विवश होंगे। इसलिए हमें अमेरिका और ब्रिक्स के बीच किसी पक्ष को चुनने की जरूरत नहीं है।

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आंतरिक मजबूती पर जोर

नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में है, ऐसे में भारत को अपनी आंतरिक क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। “अगर हमें युद्ध, अर्थव्यवस्था या टैरिफ जैसे अस्थिर दौर में रहना है, तो अपनी आंतरिक ताकतों को और मजबूत करना होगा,” उन्होंने कहा।

राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन बनेगा गेमचेंजर

सुब्रह्मण्यम ने बताया कि केंद्र सरकार की सबसे बड़ी सुधार पहल राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन नवंबर के अंत तक पूरी तरह शुरू हो जाएगी। यह मिशन भारत के विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप देगा। “यह सिर्फ पैसा फेंकने की नीति नहीं है, बल्कि वास्तविक क्षमताओं के निर्माण पर केंद्रित है। सरकार का लक्ष्य विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को मौजूदा 15-17 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करना है।

चीन से आर्थिक संबंधों पर संतुलित रुख

भारत-चीन संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि चीन विश्व अर्थव्यवस्था का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए उससे पूरी तरह अलग होना संभव नहीं है। चाहे हमें पसंद हो या न हो, भारत के लिए चीन के साथ सीमित आर्थिक जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है।

सुब्रह्मण्यम ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी का मतलब संरक्षणवाद नहीं है। इसका मतलब है आत्मनिर्भरता यानी अप्रत्याशित परिस्थितियों से खुद को सुरक्षित रखना।

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