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चीन के फार्मा व आईटी बाजार में प्रवेश के लिए भारत बढ़ाएगा दबाव
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 12 Oct 2016 03:29 AM IST
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- फोटो : ANI
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भारत व चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे को देखते हुए सरकार चीन पर अपने कई बाजार का दरवाजा भारतीय कारोबारियों के लिए खोलने को लेकर दबाव बना सकती है। चीन के कई कारोबारी क्षेत्र में भारतीय निर्यातकों को व्यापार करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सरकार के मुताबिक चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक चीन के कई क्षेत्रों के बाजार में भारतीय कारोबार की इजाजत नहीं है। इनमें मुख्य रूप से फार्मा व आईटी क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि चीन के आईटी क्षेत्र में भारत के आईटी कारोबारियों के पंजीयन में काफी समय लगता है। वैसे ही चीन के फार्मा बाजार में भारतीय दवाइयों की बिक्री मुश्किल है। उन्होंने बताया कि सरकार चीन के साथ कारोबारी बातचीत के दौरान इन सभी मुद्दों को उठाएगी ताकि चीन के बाजार में भारत का प्रवेश आसान हो सके।
सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार चीन को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन तभी संतुलित रहेगा जब भारत को चीन के बाजार में कारोबार का पर्याप्त मौका दिया जाएगा।
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वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक चीन के कई क्षेत्रों के बाजार में भारतीय कारोबार की इजाजत नहीं है। इनमें मुख्य रूप से फार्मा व आईटी क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि चीन के आईटी क्षेत्र में भारत के आईटी कारोबारियों के पंजीयन में काफी समय लगता है। वैसे ही चीन के फार्मा बाजार में भारतीय दवाइयों की बिक्री मुश्किल है। उन्होंने बताया कि सरकार चीन के साथ कारोबारी बातचीत के दौरान इन सभी मुद्दों को उठाएगी ताकि चीन के बाजार में भारत का प्रवेश आसान हो सके।
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सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार चीन को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन तभी संतुलित रहेगा जब भारत को चीन के बाजार में कारोबार का पर्याप्त मौका दिया जाएगा।
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बढ़ रहा है भारत का व्यापार घाटा
वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के मुताबिक भारत व चीन के बीच व्यापार घाटा साल 2015-16 की अप्रैल से जनवरी की अवधि के दौरान बढ़कर 44.7 अरब डॉलर का हो गया। समीक्षाधीन अवधि के दौरान चीन को भारत से 7.56अरब डॉलर का निर्यात किया गया जबकि चीन से भारत का आयात समीक्षाधीन अवधि में बढ़कर 52.26 अरब डॉलर का हो गया। साल 2014-15 में यह घाटा 48.48 अरब डॉलर का था।
मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालयों ने सितंबर 2014 में आर्थिक एवं व्यापार सहयोग के लिए पांच सालों के विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे ताकि आर्थिक एवं व्यापार संबंधों के संतुलित एवं टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रारूप तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में कहा गया है कि चीन के साथ व्यापार घाटा भारत के लिए भारी चिंता का विषय है।
मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालयों ने सितंबर 2014 में आर्थिक एवं व्यापार सहयोग के लिए पांच सालों के विकास कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए थे ताकि आर्थिक एवं व्यापार संबंधों के संतुलित एवं टिकाऊ विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रारूप तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में कहा गया है कि चीन के साथ व्यापार घाटा भारत के लिए भारी चिंता का विषय है।