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निर्मला सीतारमण: मुद्रा संकट दूर करने के लिए रुपये में व्यापार का निपटान करने पर जोर, क्या बोलीं वित्त मंत्री

Fri, 16 Oct 2026 02:50 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 16 Oct 2026 02:50 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत कठिन मुद्रा संकट से जूझ रहे व्यापारिक साझेदारों की मदद के लिए रुपये में व्यापार निपटान को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने आसियान व्यापार समझौते की समीक्षा और आरसीईपी से बाहर रहने पर भी बात की। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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India's push for Rupee Trade Settlement to aid currency-starved partners: FM
निर्मला सीतामरण - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत अपने कारोबारी साझेदारों के साथ रुपये में व्यापार निपटान को बढ़ावा देना चाहता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उन साझेदार देशों की मदद करना है जो कठिन मुद्रा की कमी का सामना कर रहे हैं। इससे वे आवश्यक वस्तुओं का आयात जारी रख सकेंगे। उन्होंने बैंकॉक, थाईलैंड में आईएमएफ-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में यह बात कही।

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भारत उन देशों के साथ व्यापार जारी रखने के लिए रुपये में निपटान की सुविधा पर काम कर रहा है। ये देश विदेशी मुद्रा बाधाओं से जूझ रहे हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि यह व्यवस्था बढ़ती आर्थिक मंदी के कारण विकसित हुई है। आर्थिक मंदी कई राष्ट्रों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रही है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्धों ने भी कई देशों को कर्ज के जाल में धकेल दिया है। इससे उन्हें भुगतान संतुलन संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय विकास संस्थानों को इन समस्याओं पर प्रतिक्रिया देने में तीन से चार साल लग जाते हैं। अब इन चीजों को सुधारा जा रहा है।

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रुपये में व्यापार निपटान क्यों जरूरी है?

कठिन मुद्रा तक पहुंचने में संघर्ष करने वाले देश अक्सर व्यापार बनाए रखने में कठिनाई महसूस करते हैं। स्थानीय मुद्रा निपटान इस समस्या को हल करने में मदद कर सकता है। भारत का लक्ष्य उन देशों को लाभ पहुंचाना है जो कठिन मुद्राओं की कमी से जूझ रहे हैं। फिर भी उन्हें कुछ वस्तुओं का आयात करना पड़ता है। रुपये में व्यापार इसे संभव बनाने का प्रयास कर रहा है। यह एक ऐसी विधि है जिसे भारत ने समझा है और उस पर काम कर रहा है।

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द्विपक्षीय संबंध और व्यापार समझौते कैसे मजबूत हो रहे हैं?

निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत अधिक सार्थक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। भारत कई व्यापार समझौतों में प्रगति कर रहा है। ये समझौते उसकी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के साथ भारत का व्यापार समझौता नई दिल्ली के प्रतिकूल है। भारत आसियान को लाभ पहुंचाने के खिलाफ नहीं है। लेकिन यह समझौता भारत के लिए बहुत प्रतिकूल है। भारत आयातक, बाजार और निर्माता के रूप में जिन चिंताओं का सामना कर रहा है, उन्हें दूर करना चाहता है। दोनों पक्ष समझौते की समीक्षा कर रहे हैं। भारत इस समझौते को "थोड़े नए रूप" में जारी रखना चाहता है।

आरसीईपी से भारत क्यों बाहर रहा?

भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते से जानबूझकर बाहर रहा। इस समझौते में एशिया और प्रशांत क्षेत्र की 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं। भारत के लिए इस समझौते में कुछ भी खास नहीं था। भारत उन सदस्य देशों के साथ व्यापार जारी रखता है। लेकिन समझौते में शामिल होना भारत के पक्ष में नहीं होता। भारत नवंबर 2019 में आरसीईपी से हट गया था। इसके पीछे सस्ते आयात, खासकर चीन से, बढ़ते व्यापार घाटे का डर था। साथ ही घरेलू उद्योग और कृषि के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अभाव भी एक कारण था।

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