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KV Subramanian: जीडीपी वृद्धि से रोजगार की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ेगी, आईएमएफ के कार्यकारी निदेशक ये बोले
Tue, 07 Nov 2023 01:23 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 07 Nov 2023 01:23 PM IST
सार
KV Subramanian: सुब्रमण्यन ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान और दूसरी लहर के दौरान, रोजगार की स्थिति खराब हो गई और यह कुछ ऐसा है जो पीएलएफएस डेटा में बहुत स्पष्ट रूप से दिखाया गया है जो पीएलएफएस डेटा की विश्वसनीयता को और बढ़ाता है। अगर आप अब समग्र रूप से देखते हैं, तो रोजगार की स्थिति में काफी सुधार हुआ है
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के वी सुब्रमण्यन
- फोटो : Social Media
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी निदेशक और भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने देश के रोजगार परिदृश्य और भारत की जीडीपी वृद्धि पर अपनी राय दी है। सुब्रमण्यन ने जोर देकर कहा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के विश्वसनीय आंकड़े स्पष्ट रूप से भारत में रोजगार की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में महत्वपूर्ण सुधार का संकेत देते हैं।
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सुब्रमण्यन ने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान और दूसरी लहर के दौरान, रोजगार की स्थिति खराब हो गई और यह कुछ ऐसा है जो पीएलएफएस डेटा में बहुत स्पष्ट रूप से दिखाया गया है जो पीएलएफएस डेटा की विश्वसनीयता को और बढ़ाता है लेकिन अगर आप अब समग्र रूप से देखते हैं, तो रोजगार की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और कोविड से पहले के स्तर की तुलना में बेहतर हो गया है।' सुब्रमण्यन के अनुसार, पीएलएफएस के आंकड़ों से पता चलता है कि नियमित कर्मचारियों और वेतनभोगी श्रमिकों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई है, जो 2017-18 में 11.5 करोड़ से बढ़कर 13 करोड़ हो गई है, जो 13 प्रतिशत सुधार को दर्शाता है।
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यह सकारात्मक प्रवृत्ति महिलाओं में उल्लेखनीय रही, जिसमें 29.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और पुरुषों के बीच, 8.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। औपचारिक रोजगार में भी 1.2 करोड़ या 25.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
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इसके अलावा, सुब्रमण्यन ने बताया कि सामान्य स्थिति में बेरोजगारी दर (यूआर) 2017-18 और 2019-20 के बीच 6.0 प्रतिशत से घटकर 4.8 प्रतिशत हो गई। श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 49.8 प्रतिशत से बढ़कर 53.5 प्रतिशत हो गई, और श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) 46.8 प्रतिशत से बढ़कर 50.9 प्रतिशत हो गया। ये सुधार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ पुरुषों और महिलाओं दोनों के बीच देखे गए थे।
हाल के रुझानों पर प्रकाश डालते हुए, सुब्रमण्यन ने कहा कि औपचारिक क्षेत्र में रोजगार 2019-20 के 5.9 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 6.3 करोड़ हो गया, जो रोजगार क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डेटा स्पष्ट रूप से भारत में रोजगार की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि के संकेत देता है।
उन्होंने कहा, "यह बहुत स्पष्ट है कि रोजगार की मात्रा में भी काफी सुधार हुआ है और बेरोजगारी दर पांच साल के निचले स्तर 3.2 प्रतिशत पर है। सुब्रमण्यम ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों द्वारा उठाई गई चिंताओं को भी संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें सीएमआईई के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है।