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मुख्य आर्थिक सलाहकार बोले: 'रुपया अपना ध्यान रखने में सक्षम, भारत नहीं कर रहा रुपये का बचाव'
Tue, 13 Sep 2022 10:36 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 13 Sep 2022 10:36 PM IST
सार
इस साल रुपये की कीमत में लगातार गिरावट का रुख देखी गई है। अगस्त में रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर 80.15 प्रति डॉलर पर आ गया था। हालांकि, मंगलवार तक रुपये ने जोरदार वापसी की और डॉलर के मुकाबले अपने महीने भर के अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर 79.15 के भाव पर बंद हुआ।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत नागेश्वरन ने रुपये के हालात पर दिया बयान।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी मुद्रा रुपये का बचाव नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये के उतार-चढ़ाव को चरणबद्ध और बाजार के रवैये के अनुरूप रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है।
नागेश्वरन ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय रुपये के प्रबंधन का तरीका अर्थव्यवस्था की बुनियाद को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपने रुपये का बचाव नहीं कर रहा है। मुझे नहीं लगता है कि देश की बुनियाद ऐसी है जहां हमें अपनी मुद्रा का बचाव करना पड़े। रुपया अपना ध्यान रखने में खुद सक्षम है।’’
गौरतलब है कि इस साल रुपये की कीमत में लगातार गिरावट का रुख देखी गई है। अगस्त में रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर 80.15 प्रति डॉलर पर आ गया था। हालांकि, मंगलवार तक रुपये ने जोरदार वापसी की और डॉलर के मुकाबले अपने महीने भर के अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर 79.15 के भाव पर बंद हुआ।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित कर रहा है कि रुपया जिस भी दिशा में जा रहा है, वह ज्यादा तेज रफ्तार से न हो और उसकी गति बाजार के हिसाब से ही हो। इसके अलावा यह ध्यान भी रखा जा रहा है कि इन कदमों से आयातकों या निर्यातकों पर किसी तरह का बोझ न पड़े।’’
विदेशी मुद्रा भंडार में हाल में आई गिरावट को लेकर नागेश्वरन ने कहा, "वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का रुख विदेशी पूंजी को भारत आने से रोक रहा है। निश्चित रूप से इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ रहा है।" आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 26 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 3.007 अरब डॉलर घटकर 561.04 अरब डॉलर रह गया।
अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस महंगाई की एक वजह आधार प्रभाव भी रही है। इसके अलावा खरीफ की फसलों की बुआई के आंकड़ों को भी बाजार गलत ढंग से ले रहा है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर सात प्रतिशत हो गई जबकि जुलाई में यह 6.71 प्रतिशत पर थी।
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नागेश्वरन ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय रुपये के प्रबंधन का तरीका अर्थव्यवस्था की बुनियाद को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपने रुपये का बचाव नहीं कर रहा है। मुझे नहीं लगता है कि देश की बुनियाद ऐसी है जहां हमें अपनी मुद्रा का बचाव करना पड़े। रुपया अपना ध्यान रखने में खुद सक्षम है।’’
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गौरतलब है कि इस साल रुपये की कीमत में लगातार गिरावट का रुख देखी गई है। अगस्त में रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर 80.15 प्रति डॉलर पर आ गया था। हालांकि, मंगलवार तक रुपये ने जोरदार वापसी की और डॉलर के मुकाबले अपने महीने भर के अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर 79.15 के भाव पर बंद हुआ।
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मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित कर रहा है कि रुपया जिस भी दिशा में जा रहा है, वह ज्यादा तेज रफ्तार से न हो और उसकी गति बाजार के हिसाब से ही हो। इसके अलावा यह ध्यान भी रखा जा रहा है कि इन कदमों से आयातकों या निर्यातकों पर किसी तरह का बोझ न पड़े।’’
विदेशी मुद्रा भंडार में हाल में आई गिरावट को लेकर नागेश्वरन ने कहा, "वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का रुख विदेशी पूंजी को भारत आने से रोक रहा है। निश्चित रूप से इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ रहा है।" आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 26 अगस्त को समाप्त सप्ताह में 3.007 अरब डॉलर घटकर 561.04 अरब डॉलर रह गया।
अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस महंगाई की एक वजह आधार प्रभाव भी रही है। इसके अलावा खरीफ की फसलों की बुआई के आंकड़ों को भी बाजार गलत ढंग से ले रहा है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर सात प्रतिशत हो गई जबकि जुलाई में यह 6.71 प्रतिशत पर थी।