Research: 'भारत को शोध पर ध्यान बढ़ाकर भविष्य गढ़ना होगा', बोले इन्फोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति
आईटी उद्योग के दिग्गज नारायण मूर्ति ने कहा कि आज देश के लिए सबसे बड़ी जरूरत है कि हम अपने राष्ट्रीय और संस्थागत शोध पर फोकस को और मजबूत करें, ताकि भारत और विश्व का बेहतर निर्माण किया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान का उद्देश्य असफलताओं से हार न मानना, उनसे सीखना, भविष्य में गलतियों से बचना और निरंतर सुधार करना है।
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इन्फोसिस के संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने बुधवार को कहा कि भारत को राष्ट्रीय और संस्थागत स्तर पर शोध पर अपना ध्यान मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि यही वह रास्ता है, जिससे देश और दुनिया को बेहतर बनाया जा सकता है।
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देश में शोधकर्ताओं के लिए प्रेरक माहौल उपलब्ध कराए
मूर्ति ने कहा कि देश में एक अभिलाषी, मेरिट आधारित और प्रतिस्पर्धी शोध पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की जरूरत है, जो वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, अर्थशास्त्रियों, गणितज्ञों और मानविकी के शोधकर्ताओं के लिए प्रेरक माहौल उपलब्ध कराए।
शोध मन के विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है
उन्होंने रोमन सम्राट मार्कस ऑरेलियस का हवाला देते हुए कहा कि शोध मन के विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे प्रकृति के रहस्यों को सुलझाने, नई दृष्टि से देखने और मानवता की जटिल समस्याओं के असंभव लगने वाले समाधानों को खोजने की प्रेरणा मिलती है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपित फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के पत्र का किया जिक्र
उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट द्वारा डॉ. वैन्नेवर बुश को लिखे एक ऐतिहासिक पत्र का भी जिक्र किया, जिससे विज्ञान- अंतहीन सीमा शीर्षक से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट और अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन की स्थापना हुई। मूर्ति ने कहा कि इसने अमेरिका को वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग शोध, अंतरिक्ष अभियानों, सतत वित्त पोषण और विश्वविद्यालयों व उद्योगों में नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाया।
अनुसंधान के उद्देश्य पर दिया जोर
उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, रिचर्ड फाइनमैन, एलन ट्यूरिंग, थॉमस अल्वा एडिसन और जेनिफर डूडना जैसे वैज्ञानिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और दृढ़ता ही वैज्ञानिक खोज की असली नींव हैं। मूर्ति ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान का उद्देश्य असफलताओं से हार न मानना, उनसे सीखना, भविष्य में गलतियों से बचना और निरंतर सुधार करना है।