Deloitte India: चालू वित्तीय वर्ष में 6% से 6.3% रह सकती है वृद्धि दर, वैश्विक विकास की अड़चनें भी घटीं
Deloitte India: रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत में मजबूत आर्थिक गतिविधियां जारी हैं। अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को ध्यान में रखते हुए डेलॉयट आर्थिक परिदृश्य पर आशावादी है और उसने इस साल और अगले साल के लिए अपनी उम्मीदें जाहिर की हैं। डेलॉयट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की वृद्धि दर 6 से 6.3 प्रतिशत के बीच रहेगी और उसके बाद यह और मजबूत होगी।
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डेलॉयट इंडिया ने अपने आर्थिक परिदृश्य के अनुमानों में भारत की वृद्धि दर पर सकारात्मक टिप्पणी की है। डेलॉयट इंडिया ने कहा है कि 31 मार्च, 2024 को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6-6.3 प्रतिशत रह सकती है। आर्थिक दृष्टिकोण के अनुसर, "इस साल प्रमुख औद्योगिक देशों में मंदी की आशंका के कारण आर्थिक संकेतक कमजोर हुए हैं। तंग श्रम बाजार और अमेरिकी बैंकिंग संकट के बाद कम जोखिम प्रसार से पता चलता है कि वैश्विक विकास के लिए नकारात्मक जोखिम कम हो रहे हैं। हालांकि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों की ओर से उठाए गए कदमों और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण महत्वपूर्ण अनिश्चितताएं अब भी बनी हुई हैं।"
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत में मजबूत आर्थिक गतिविधियां जारी
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत में मजबूत आर्थिक गतिविधियां जारी हैं। अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को ध्यान में रखते हुए डेलॉयट आर्थिक परिदृश्य पर आशावादी है और उसने इस साल और अगले साल के लिए अपनी उम्मीदें जाहिर की हैं। डेलॉयट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की वृद्धि दर 6 से 6.3 प्रतिशत के बीच रहेगी और उसके बाद यह और मजबूत होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वैश्विक अनिश्चितताएं कम होती हैं तो अगले दो साल में वृद्धि दर सात प्रतिशत को पार कर जाने की उम्मीद है। अगर वैश्विक अनिश्चितता में कमी आती है तो भारत की वृद्धि दर अगले दो वर्षों में 7 प्रतिशत को पार कर सकती है।
भारत मजबूत आर्थिक परिदृश्य का लाभ ले रहा
रिपोर्ट के अनुसार, "भारत इस समय मजबूत आर्थिक परिदृश्य का लुत्फ उठा रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए हमारा विकास पूर्वानुमान हमारे अप्रैल के पूर्वानुमान के समान है, सिवाय इसके कि वित्त वर्ष FY2022-23 में उम्मीद से अधिक वृद्धि ने तुलना के लिए हमारा आधार बढ़ा दिया है।"
ज्यादातर कर्ज उद्योग और सेवा क्षेत्र में दिए जा रहे, ये निवेश में सुधार के संकेत
डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, "हमने अर्थव्यवस्था में उछाल को देखते हुए अपनी निचली सीमा बढ़ा दी है। शहरी मांग की स्थिति लचीली बनी हुई है। मिडियम और महंगी गाड़ियों की बिक्री, यूपीआई लेनदेन की संख्या और घरेलू हवाई यात्री यातायात के डेटा इस बात की तसदीक करते हैं। ग्रामीण मांग जो पिछड़ रही थी हाल ही में ट्रैक्टरों की बिक्री, आईआईपी गैर-टिकाऊ वस्तुओं और मनरेगा के आंकड़ों में वृद्धि से बढ़ी है। निवेश भी आकर्षण दिखा रहा है। बढ़ती ब्याज दरों के बावजूद क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में महामारी के निचले स्तर से मजबूत सुधार है। उन्होंने कहा, "ज्यादातर कर्ज उद्योग और सेवा क्षेत्र में दिया जा रहा है। यह निवेश में सुधार की ओर इशारा करता है, जिसका मतलब है कि आपूर्ति पक्ष बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी कमर कस रहा है।"