आदित्य पुरी ने दिया बयान, कहा- जनवरी से आएगी अर्थव्यवस्था में तेजी
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एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य पुरी ने कहा है कि अगले वर्ष की शुरुआत से अर्थव्यवस्था गति पकड़ लेगी। पुरी ने कहा है कि वित्तीय क्षेत्र और बैंकों का संकट खत्म हो रहा है और हम जहां हैं उससे आगे बढ़ने जा रहे हैं। आदित्य पुरी ने कहा कि सुधार का माहौल बन चुका है। हालांकि रियल एस्टेट सेक्टर में जिनका पैसा लगा है, उन्हें कुछ मुश्किलों का अभी सामना करना पड़ सकता है।
जनवरी से दिखेगा सुधार
उन्होंने यह भी कहा कि देश के बड़े आकार के चलते परिवर्तन होने में थोड़ा समय लगेगा। यही कारण है कि सुधार जनवरी से दिखना शुरू होगा। बैंकों में कर्ज की मांग बढ़ना अर्थव्यवस्था में तेजी का संकेत है।
सरकारी बैंकों ने भी उठाए कदम
आने वाले दिनों में राजस्व घाटा बढ़ सकता है। हालांकि विनिवेश प्रक्रिया, जीएसटी के ठीक-ठाक संग्रह और आयकर की मदद से इसमें सुधार संभव है। एनबीएफसी संकट अब खत्म हो चुका है। मौजूदा समय में कोई ऐसी बड़ी एनबीएफसी नहीं है जो संकट में हो। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकारी बैंकों ने भी कर्ज देना शुरू कर दिया है।
18 माह से जीडीपी में गिरावट
इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी 5.8 फीसदी से घटकर के पांच फीसदी रह गई है। वित्त मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इन आंकड़ों को जारी किया है। पिछले साल यह इसी दौरान आठ फीसदी के पार थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में यह 5.8 फीसदी थी।
साढ़े छह साल में सबसे सुस्त रफ्तार
- वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर की पिछले साढ़े छह सालों में सबसे ज्यादा सुस्त रफ्तार देखने को मिली।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 12.1 फीसदी के मुकाबले 0.6 फीसदी ग्रोथ देखने को मिली।
- कृषि क्षेत्र में ग्रोथ 5.1 फीसदी से घटकर के दो फीसदी रह गई है।
- खनन क्षेत्र में ग्रोथ 0.4 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली थी, जो अब बढ़कर के 2.7 फीसदी हो गई है।
- कंस्ट्रक्शन सेक्टर में पिछले साल की पहली तिमाही में ग्रोथ 9.6 फीसदी थी जो अब घटकर के 5.7 फीसदी रह गई है।
- होटल, ट्रांस्पोर्ट और ट्रेड सेक्टर में ग्रोथ 7.8 फीसदी से घटकर के 7.1 फीसदी रह गई है।
- वित्तीय, रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ 6.5 फीसदी से घटकर के 5.9 फीसदी रह गई है।
हालांकि शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया था। वहीं वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी का अनुमान 7.2 फीसदी कर दिया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया।