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खुशखबरी: भारत का चालू खाता घाटा पिछले साल के मुकाबले घटकर आधा हुआ, पर अभी भी जीडीपी के एक प्रतिशत के बराबर
Thu, 28 Sep 2023 03:36 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 28 Sep 2023 03:36 PM IST
सार
रिजर्व बैंक ने जानकारी दी है कि भारत का चालू खाता घाटा पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले घटकर लगभग आधा हो गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
रिजर्व बैंक ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा कम होकर 9.2 अरब डॉलर हो गया है, जो कि भारत की कुल जीडीपी का 1.1 प्रतिशत है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत का चालू खाता घाटा 17.9 अरब डॉलर था, जो कि भारत की जीडीपी का 2.1 प्रतिशत था। हालांकि चालू खाता घाटा पिछली तिमाही के मुकाबले यह ज्यादा है। पिछली तिमाही में चालू खाता घाटा 1.3 अरब डॉलर था, जो कि जीडीपी का 0.2 प्रतिशत था।
इन वजहों से आया चालू खाता घाटे में उछाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल जून तिमाही में बढ़ते व्यापार घाटे और नेट सर्विसेज में कम सरप्लस के साथ ही प्राइवेट ट्रांसफर रिसीट में कमी के कारण चालू खाते में पिछली तिमाही के मुकाबले उछाल आया है। प्राइवेट ट्रांसफर रिसीट का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजे जाने वाले पैसे से आता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली तिमाही के मुकाबले यह बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक ही है। विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि बिगड़ते ट्रेड बैलेंस, तेल की बढ़ती कीमतों और आयात में बढ़ोतरी की वजह से अभी चालू खाता घाटे के और बढ़ने की आशंका है।
चालू खाता घाटा अर्थव्यवस्था को करता है कमजोर
बता दें कि चालू खाता घाटा तब होता है जब आयात की गई वस्तुओं, सेवाओं और निवेश का मूल्य, निर्यात से ज्यादा होता है। चालू खाता घाटा किसी भी देश की मुद्रा को कमजोर कर सकता है और आयात को महंगा कर सकता है। इसका अर्थव्यवस्था में महंगाई को बढ़ाने में अहम योगदान होता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा 16.8 अरब डॉलर था, वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में यह 13.4 अरब डॉलर था। बीते दिनों में सेवा आधारित व्यापार में उछाल की वजह से चालू खाता घाटे में कमी आई है।
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भारत का विदेशी कर्ज बढ़कर 629 अरब डॉलर हुआ
रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों में बताया गया है कि भारत का विदेशी कर्ज जून के अंत तक बढ़कर 629.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। हालांकि भारत के कर्ज-जीडीपी अनुपान में गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत पर विदेशी कर्ज 624 अरब डॉलर था, जो कि जून के अंत तक 4.7 अरब अमेरिकी बढ़कर 629 अरब डॉलर हो गया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि सामान्य बकाया कर्ज कम हुआ है जबकि गैर सरकारी कर्ज जून 2023 में बढ़ गया है। इसके अलावा विदेशी कर्ज में 32.9 प्रतिशत की सबसे अधिक हिस्सेदारी कर्ज की रही, इसके बाद मुद्रा तथा जमा, व्यापार ऋण और अग्रिम और ऋण प्रतिभूतियों का योगदान रहा।
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इन वजहों से आया चालू खाता घाटे में उछाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल जून तिमाही में बढ़ते व्यापार घाटे और नेट सर्विसेज में कम सरप्लस के साथ ही प्राइवेट ट्रांसफर रिसीट में कमी के कारण चालू खाते में पिछली तिमाही के मुकाबले उछाल आया है। प्राइवेट ट्रांसफर रिसीट का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजे जाने वाले पैसे से आता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली तिमाही के मुकाबले यह बढ़ोतरी उम्मीद के मुताबिक ही है। विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि बिगड़ते ट्रेड बैलेंस, तेल की बढ़ती कीमतों और आयात में बढ़ोतरी की वजह से अभी चालू खाता घाटे के और बढ़ने की आशंका है।
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चालू खाता घाटा अर्थव्यवस्था को करता है कमजोर
बता दें कि चालू खाता घाटा तब होता है जब आयात की गई वस्तुओं, सेवाओं और निवेश का मूल्य, निर्यात से ज्यादा होता है। चालू खाता घाटा किसी भी देश की मुद्रा को कमजोर कर सकता है और आयात को महंगा कर सकता है। इसका अर्थव्यवस्था में महंगाई को बढ़ाने में अहम योगदान होता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा 16.8 अरब डॉलर था, वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में यह 13.4 अरब डॉलर था। बीते दिनों में सेवा आधारित व्यापार में उछाल की वजह से चालू खाता घाटे में कमी आई है।
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भारत का विदेशी कर्ज बढ़कर 629 अरब डॉलर हुआ
रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों में बताया गया है कि भारत का विदेशी कर्ज जून के अंत तक बढ़कर 629.1 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। हालांकि भारत के कर्ज-जीडीपी अनुपान में गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत पर विदेशी कर्ज 624 अरब डॉलर था, जो कि जून के अंत तक 4.7 अरब अमेरिकी बढ़कर 629 अरब डॉलर हो गया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि सामान्य बकाया कर्ज कम हुआ है जबकि गैर सरकारी कर्ज जून 2023 में बढ़ गया है। इसके अलावा विदेशी कर्ज में 32.9 प्रतिशत की सबसे अधिक हिस्सेदारी कर्ज की रही, इसके बाद मुद्रा तथा जमा, व्यापार ऋण और अग्रिम और ऋण प्रतिभूतियों का योगदान रहा।
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