RBI Bulletin: 'भारत आठ प्रतिशत की वृद्धि दर को बरकरार रख सकता है', आरबीआई की बुलेटिन में दावा
आरबीआई की बुलेटिन के अनुसार 2021-24 की अवधि में भारत की विकास दर औसतन 8 प्रतिशत से ऊपर रही है। इकोनॉमी की बुनियादी बातों से संकेत मिलता है कि इसे आगे भी बनाए रखा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार चालू खाता घाटा मामूली है, बाहरी बफर भी लचीले हैं। कंपनियां अपनी ऋण सेवा क्षमता में लगातार सुधार कर रहे हैं।
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रिजर्व बैंक के मार्च बुलेटिन में 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि भारत सालाना 8 प्रतिशत की वृद्धि दर पर बने रह सकता है। मंगलवार को प्रकाशित बुलेटिन के लेख के अनुसार अनुकूल वृहद आर्थिक परिदृश्य देश की वृद्धि दर को तेज करने का प्रमुख कारण बन सकता है।
2021-24 की अवधि में, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि औसतन 8 प्रतिशत से ऊपर रही है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम द्वारा लिखे गए लेख में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था गति खो रही है। कुछ सबसे लचीली अर्थव्यवस्थाओं में विकास की गति धीमी हो रही है और उच्च आवृत्ति संकेतक आने वाले समय में और अधिक स्तर पर आने की ओर इशारा करते हैं।
भारत में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 2023-24 की अक्टूबर-दिसंबर अवधि में छह तिमाही के उच्च स्तर पर थी। इसका कारण अर्थव्यवस्था की मजबूत गति, अप्रत्यक्ष करों में इजाफा और सब्सिडी में कमी था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया कई बड़े बदलावों का सामना कर रही है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में जा रही है।
2021-24 की अवधि में भारत की विकास दर औसतन 8 प्रतिशत से ऊपर
2021-24 की अवधि में भारत की विकास दर औसतन 8 प्रतिशत से ऊपर रही है। इकोनॉमी की बुनियादी बातों से संकेत मिलता है कि इसे आगे भी बनाए रखा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार चालू खाता घाटा मामूली है, बाहरी बफर भी लचीले हैं। कंपनियां अपनी ऋण सेवा क्षमता में लगातार सुधार कर रहे हैं।
लेख के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में बैलेंस शीट मजबूत और स्वस्थ हैं। वित्तीय बाजार में भी सही संकेत मिल रहे हैं। भारत में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने से पूंजी प्रवाह फिर से शुरू हो गया है। लेखकों ने आगे कहा कि तकनीक अधिक प्रतिस्पर्धी और कुशल बनकर विकास के नए अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दशकों में इन अनुकूल कारकों को अवसरों और शक्तियों में बदलने के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा, मजबूत विनिर्माण आधार, उच्च गुणवत्ता वाले श्रम बल और सेवाओं के मामले में नई पहल करने का समय आ गया है।
2037 तक विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क का निर्माण करने का लक्ष्य
लेख में आगे कहा गया है कि 2023-24 की तीसरी तिमाही में कुल मांग निवेश-संचालित थी, जिसमें निजी कैपेक्स में सुधार के संकेत मिल रहे थे। कई क्षेत्रों में क्षमता उपयोग एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गया है जहां नए निवेश होने हैं। चालू वित्त वर्ष में संभवतः चार-लेन सड़कों की अब तक की सबसे अधिक लंबाई का निर्माण किया जाएगा। 2037 तक विश्व स्तरीय सड़क नेटवर्क का निर्माण किया जाना है। यह भी कहा गया है कि प्रीमियम उपभोक्ता व्यवसायों के लिए मांग का दृष्टिकोण मजबूत है। इससे पता चलता है कि प्रति व्यक्ति आय में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। छोटे शहरों के पैदा हो रहे अवसरों से लाइफस्टाइल सेगमेंट में व्यापार बढ़ रहा है। इन बाजारों में प्रवेश करने वाली कंपनियों को फर्स्ट मूवर्स होने का फायदा मिल रहा है।