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रिपोर्ट: जीडीपी में बैंक ऋण की हिस्सेदारी 50% के पार पहुंचेगी, जानें एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने क्यों जताया अनुमान
Mon, 02 May 2022 04:59 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Mon, 02 May 2022 04:59 PM IST
सार
भारतीय स्टेट बैंक की सोमवार को जारी इकोरैप रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (नॉमिनल जीडीपी) में वृद्धिशील या बढ़े हुए बैंक ऋण की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष में 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह अनुपात 27 प्रतिशत पर रहा था
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- फोटो : Social Media
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विस्तार
सोमवार को जारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की इकोरैप रिपोर्ट में वित्त वर्ष 23 में आर्थिक वृद्धि में बैंकों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (नॉमिनल जीडीपी) में वृद्धिशील या बढ़े हुए बैंक ऋण की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष में 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है।
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इकारैप रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष 2021-22 में यह अनुपात 27 प्रतिशत पर रहा था, जो कि पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर था। इससे पहले वित्त वर्ष 2019-20 के अंत में सात साल की अवधि की औसत हिस्सेदारी 50 प्रतिशत आंकी गई थी। गौरतलब है कि नॉमिलन जीडीपी के अनुपात में बैंक ऋण का उच्च स्तर प्रदर्शित करता है कि वास्तविक अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र की भागीदारी कितनी सक्रिय हे। वहीं यह अनुपात कम रहने का मतलब है कि अर्थव्यवस्था को ज्यादा औपचारिक ऋण की जरूरत है। महामारी से पहले के वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी के अनुपात में बढ़ा हुआ कर्ज 63 प्रतिशत के उच्चस्तर पर पहुंच गया था।
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एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया कि हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी में बैंक ऋण की हिस्सेदारी फिर से 50 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। यह आर्थिक वृद्धि में बैंकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2021-22 में सभी प्रमुख क्षेत्रों के सुधरे हुए प्रदर्शन से बैंकों के ऋण में 9.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले वित्त वर्ष में 10.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धिशील ऋण वृद्धि दर्ज की गई, जो एक साल पहले के 5.8 लाख करोड़ रुपये का 1.8 गुना है।
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