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आईएमएफ ने कहा, डिजिटल सुधारों से घटा फर्जीवाड़ा और कम हुए खर्च

Wed, 10 Apr 2019 05:39 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 10 Apr 2019 05:39 PM IST
सार

  • आईएमएफ ने कहा, भारत को डिजिटलीकरण का बहुत लाभ मिला
  • 17 फीसदी घटा है सार्वजनिक सहायता कार्यक्रम का खर्च
  • 41 फीसदी तक फर्जीवाड़ा रुका है आंध्र प्रदेश की योजनाओं में 

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imf praises india's effort of digitization, says expenses and forgery came down

विस्तार

भारत में डिजिटल सुधारों की सराहना करते हुए आईएमएफ ने कहा है कि इससे फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के साथ खर्च घटाने में मदद मिली है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देकर भारत ने मनमाने ढंग से काम करने के रवैये पर भी काबू पाया है।

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को जारी राजकोषीय निगरानी रिपोर्ट में कहा कि भारत में कल्याणकारी योजनाओं के लिए ई-खरीद की शुरुआत करने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और निर्माण की गुणवत्ता में सुधार आया है। लगातार डिजिटलीकरण से लेनदेन सरल और सुरक्षित होने के साथ फर्जीवाड़े पर लगाम लगी है।
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रिपोर्ट में लिखा है कि भारत में सार्वजनिक सहायता कार्यक्रम के प्रबंधन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाने से खर्चे में 17 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इससे मिलने वाले लाभ में कोई कमी नहीं हुई। इसी तरह, आंध्र प्रदेश में स्मार्ट आईडी कार्ड के इस्तेमाल से जरूरतमंदों के लिए चलाए जा रहे विशिष्ट कार्यक्रमों में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा 41 फीसदी तक कम किया गया। स्मार्ट आईडी कार्ड से सही लाभार्थियों की पहचान में मदद मिली।

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प्रबंधन में सुधार से रुकेगा भ्रष्टाचार

आईएमएफ ने कहा कि सार्वजनिक खरीद की प्रक्रिया में गड़बड़ी होने से उत्पाद की कीमतों और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रबंधन में सुधार और धन की बर्बादी पर लगाम लगाकर भ्रष्टाचार रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि शीर्ष ऑडिट संस्थानों, संसद और नागरिक समाज की जांच हो जिससे जनता के पैसों के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनाई जा सके। इससे अधिकारियों की जवाबदेही भी बनेगी।

घाटा 3 फीसदी लाने में वक्त लगेगा 

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अपना राजकोषीय घाटा 3 फीसदी तक लाने में अभी वक्त लगेगा, जबकि जीडीपी के मुकाबले कर्ज का 40 फीसदी लक्ष्य भी 2024 के बाद ही हासिल होगा। इस दौरान, सरकार के सामान्य कर्ज में बढ़ोतरी होगी और यह जीडीपी के मुकाबले 72 फीसदी पहुंच जाएगा।

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