चंदा कोचर से 340 करोड़ रुपये वसूलने के लिए ICICI बैंक ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी पूर्व सीएमडी चंदा कोचर से बर्खास्तगी के बाद 340 करोड़ रुपये से अधिक रकम वसूलने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। बैंक ने अपनी याचिका में मांग की है कि कोचर की याचिका को खारिज करते हुए बोनस सहित अन्य भत्तों को वापस लेने की मंजूरी दी जाए।
चंदा कोचर को 2009 के बाद से उनके कार्य प्रदर्शन पर दिया गया 9 करोड़ रुपये से अधिक का बोनस और अन्य भत्ते बैंक को लौटाने पड़ सकते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने बैंक के नियमों और भारत के कानून का उल्लंघन किया है। उन्हें इन आरोपों के चलते नौकरी से निकाला गया हुआ माना गया है। इसलिए उनके सभी मौजूदा भविष्य के फायदे बंद होंगे।
चंदा कोचर ने नवंबर में दायर की थी याचिका
चंदा कोचर ने बैंक द्वारा की गई बर्खास्तगी को अनुचित बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। चंदा कोचर का कहना था कि बैंक ने उन्हें फरवरी 2019 में टर्मिनेशन का लेटर थमा दिया, जबकि अक्टूबर 2018 में ही उनके जल्द रिटायरमेंट होने की अर्जी स्वीकार कर ली गई थी। कोचर ने 20 नवंबर को याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट में जस्टिस आर वी मोरे और एस पी तावड़े की खंडपीठ ने कोचर के वकील सुजॉय कांतावाला से बैंक द्वारा दाखिल शपथ पत्र को पढ़ने के लिए कहते हुए आगामी 20 जनवरी तक सुनवाई को टाल दिया है।
340 करोड़ रुपये के शेयर
बैंक की विभिन्न वार्षिक रिपोर्टों के मुताबिक, कोचर को 94 लाख शेयर कर्मचारी शेयर विकल्प योजना के तहत दिए गए, हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है उन्होंने इनमें से कितने का इस्तेमाल किया। अगर कोचर को कर्मचारी शेयर स्वामित्व योजना (ईएसओपी) के तहत दिए गए कुल शेयरों की बात की जा देखा तो वर्तमान बाजार मूल्य पर इनका कुल मूल्य करीब 340 करोड़ रुपये बैठता है। हालांकि, यह राशि काफी कम भी हो सकती है क्योंकि पिछले नौ साल के दौरान हो सकता है उन्होंने कुछ शेयर बेच दिए हों।
आईसीआईसीआई बैंक की ओर से कराई गई स्वतंत्र जांच में बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर को बैंक की आचार संहिता का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी एन श्रीकृष्णा की समिति ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोचर के स्तर पर वार्षिक खुलासों की जांच-पड़ताल में ढिलाई बरती गई और आचार संहिता का उल्लंघन किया गया।
रिपोर्ट के आधार पर बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक की आंतरिक नीतियों के तहत कोचर के इस्तीफे को उनकी 'गलतियों पर बर्खास्तगी' के तौर लेने का फैसला किया है।