तीन कंपनियों पर जीएसटी का लाभ ग्राहकों तक न पहुंचाने का आरोप
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देश की तीन प्रमुख एमसीजी कंपनियों को जीएसटी का लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाने का आरोप लगा है। इस मामले में एंटी प्रोफिटेयरिंग अथॉरिटी ने तीनों को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन तीन बड़ी कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों पर भी जीएसटी में कमी होने के बाद भी इसका लाभ ग्राहकों को नहीं दिया था।
जुलाई 2017 में लागू हुआ था जीएसटी
एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया था। उसके बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले और पीएंडजी समेत तमाम कंपनियां अपने अपने उत्पादों पर 28 फीसदी टैक्स लगाकर बेचा था। हालांकि तब कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई थी। नवंबर में जीएसटी दर को घटाकर के 18 फीसदी कर दिया था। हालांकि इसके बाद भी कंपनियों ने उत्पादों की कीमतों को कम नहीं किया था।
एनएए ने माना है कि कंपनियों ने ज्यादातर लाभ को अपने पास रखा। हालांकि कंपनियों का तर्क है कि जब टैक्स की दर को 15 से बढ़ा कर के 28 फीसदी किया गया था, तब उन्होंने ज्यादा रेट को नहीं बढ़ाया था। एनएए जुलाई-अक्तूबर 2017 की कीमतों को बेस प्राइस मानते हुए कहा है कि तब की कीमतों और जीएसटी दर कम होने के बाद की कीमतों में काफी अंतर था।
वहीं इस बारे में नेस्ले कंपनी का कहना है कि वो देश के सभी नियमों को पूरी तरह से पालन करती है और अपनी कॉरपोरेट जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी तरह से करती है। कंपनी का कहना है कि वो जीएसटी नियमों का पालन करते हुए इसका लाभ सभी संबंधित वर्गों तक पहुंचा रही है। प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त होते ही कंपनी ने गणना के बाद तय राशि को उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करा दिया है।
कंपनियों को हो रहा है नुकसान
हालांकि कंपनियों का कहना है कि जीएसटी दर कम होने के बाद भी उनको लंबे समय तक नुकसान होता रहा, लेकिन इस पर किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हो रही है।
छोटे पैकेट की नहीं घटाई कीमत
कंपनियों ने छोटे तेल, शैंपू आदि के पैकेट की कीमतों में कमी नहीं की थी, जिसके चलते यह नोटिस भेजा गया है। अब कंपनियां कोर्ट की मदद ले रही हैं ताकि इनको छूट मिलें। वहीं कुछ कंपनियों ने एएआई को नोटिस का जवाब भेज दिया है।