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जीएसटी चोरी में रेस्तरां और छोटे कारोबारियों की होगी जांच
Tue, 30 Apr 2019 05:56 AM IST
गौरव द्विवेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Tue, 30 Apr 2019 05:56 AM IST
सार
- 6.10 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी वसूलने का लक्ष्य रखा है सरकार ने 2019-20 में
- 4.25 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी के रूप में मिले थे वित्त वर्ष 2018-19 में
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जीएसटी (सांकेतिक)
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विस्तार
छोटे रेस्तरां और खुदरा कारोबारियों की बड़ी कर चोरी की शिकायतों के बाद जीएसटी अधिकारी व्यापक पड़ताल की तैयारी में हैं। मामले से जुड़े एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि बड़ी संख्या में छोटे रेस्तरां और बिजनेस टू कंज्यूमर (बी2सी) संस्थाओं या खुदरा कारोबारियों द्वारा उपभोक्ताओं से जीएसटी वसूला जाता है, लेकिन इसे सरकारी राजस्व तक नहीं पहुंचाया जाता।
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जीएसटी अधिकारी के अनुसार, विभाग की ओर से जारी आईरिस पेरिडॉट एप के माध्यम से हजारों ग्राहकों ने शिकायत की है कि छोटे रेस्तरां उनसे जीएसटी वसूलते हैं, लेकिन वे आयकर विभाग को टैक्स का भुगतान नहीं करते। इतना ही नहीं इनमें से अधिकतर जीएसटी रिटर्न तक दाखिल नहीं करते हैं। इसी तरह की शिकायत खुदरा कारोबारियों या छोटे संस्थाओं की भी मिली है। इसमें सबसे ज्यादा बी2सी संस्थान हार्डवेयर, सैनिटरी वेयर, फर्नीचर और इलेक्ट्रिक सामानों के शामिल हैं। इन उत्पादों की दुकानों पर ग्राहकों से जीएसटी वसूला जाता है, लेकिन इसे न तो रिटर्न में दाखिल करते हैं और न ही इस पर टैक्स जमा करते हैं।
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जीएसटी अधिकारी ने कहा कि इस तरह की शिकायतों का अंबार लग गया है। विभाग अब संभावित कर चोरी को उजागर करने का तंत्र तैयार कर रहा है, जिस पर कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को भेजा जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कर्मचारियों की कमी के कारण छोटी टैक्स चोरी रोकना बेहद मुश्किल होता है।
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कंपोजिशन स्कीम में भी ले रहे टैक्स
जीएसटी अधिकारी ने बताया कि कई उपभोक्ताओं ने कंपोजिशन स्कीम का लाभ लेने वाले छोटे रेस्तरां और दुकानदारों की ओर से टैक्स वसूली की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि 1.5 करोड़ सालाना टर्नओवर वाले कारोबार कंपोजिशन स्कीम में आते हैं और उन्हें ग्राहकों को देने वाले इनवॉइस पर यह लिखना जरूरी होता है। ऐसे कारोबारी ग्राहकों से जीएसटी नहीं वसूल सकते हैं और उन्हें सिर्फ 1 फीसदी जीएसटी सरकार को चुकाना होता है, जबकि रेस्तरां को 5 और सेवा प्रदाताओं को 6 फीसदी जीएसटी देना होता है।
रिटर्न के बारे में बताता है एप
जीएसटी सुविधा प्रदाता की ओर से जारी आईरिस पेरिडॉट एप उपभोक्ताओं के लिए नया हथियार है। इसकी मदद से कारोबार के विशिष्ट जीएसटी पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) को स्कैन कर यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित संस्थान या रेस्तरां की ओर से रिटर्न दाखिल किया गया है या नहीं। अगर उपभोक्ता ने इस बाबत शिकायत की तो उसे रियल टाइम में आयकर विभाग के पास भेजा जाता है और कारोबारी या रेस्तरां के खिलाफ कार्रवाई होती है।
कर संग्रह बढ़ाने को चोरी रोकना जरूरी
प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) इंडिया पार्टनर प्रतीक जैन का कहना है कि बी2सी में टैक्स चोरी रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। अगर उसे कर संग्रह में 20 फीसदी उछाल के लक्ष्य को पाना है तो इस क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट और रेस्तरां क्षेत्र में आईटीसी का लाभ नहीं दिए जाने का असर भी इसमें बाधा बन रहा है।