वित्त मंत्री: 'वित्त मंत्रालय एलआईसी को निवेश की सलाह नहीं देता', सीतारमण बोलीं- अदाणी में निवेश एसओपी के तहत
लोकसभा में सोमवार को मणिपुर जीएसटी (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025 पेश होने के बाद पारित हो गया। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण यह संशोधन अध्यादेश के माध्यम से किया गया था, जिसे अब इस विधेयक के जरिए विधायी मान्यता मिल गई है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि उनका मंत्रालय भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को उसके निवेश निर्णयों के संबंध में कोई परामर्श या निर्देश जारी नहीं करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र की इस बीमा कंपनी ने अदाणी समूह में जो निवेश किया है, वह स्थापित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप है।
भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में, बुनियादी बातों और विस्तृत जांच-पड़ताल के आधार पर विभिन्न कंपनियों में निवेश के फैसले लिए हैं। स्थापित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार जांच-पड़ताल के बाद, इसने अदाणी समूह की आधा दर्जन सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर खरीदे हैं, जिनका बुक वैल्यू 38,658.85 करोड़ रुपये है और समूह के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में 9,625.77 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
उन्होंने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, "वित्त मंत्रालय एलआईसी फंड के निवेश से संबंधित मामलों के संबंध में एलआईसी को कोई सलाह/निर्देश जारी नहीं करता है।" उन्होंने कहा कि राज्य स्वामित्व वाली बीमा कंपनी के निवेश संबंधी निर्णय "केवल एलआईसी द्वारा ही सख्त परिश्रम, जोखिम मूल्यांकन और प्रत्ययी अनुपालन के बाद लिए जाते हैं।"
उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) (जहां भी लागू हो) द्वारा समय-समय पर जारी किए गए विनियमों से शासित होते हैं।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के बीच संसद से जीएसटी संशोधन बिल पारित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में मणिपुर जीएसटी (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। यह विधेयक 7 अक्तूबर 2025 को जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा और जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों को लागू करने के लिए आवश्यक बदलावों को औपचारिक रूप देगा।
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56वीं जीएसटी परिषद, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों शामिल हैं, ने जीएसटी ढांचे का बड़ा पुनर्गठन करते हुए करीब 375 वस्तुओं पर कर दरों का सरलीकरण करने का निर्णय लिया था। इसके तहत 5%, 12%, 18% और 28% की चार दरों को खत्म कर दो स्लैब- 5% और 18% में समाहित किया गया। इसके अलावा, अत्यधिक विलासिता वाले उत्पादों पर 40% की विशेष कर दर तय की गई। नई दरें 22 सितंबर को देशभर में लागू हो चुकी हैं।
राष्ट्रपति शासन के बीच मणिपुर में जीएसटी कानून हुआ लागू
इन बदलावों को प्रभावी बनाने के लिए सभी राज्यों को अपने-अपने राज्य जीएसटी कानूनों में संशोधन करना आवश्यक था। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण यह संशोधन अध्यादेश के माध्यम से किया गया था, जिसे अब इस विधेयक के जरिए विधायी मान्यता मिल गई है।