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शक्तिकांत दास ने दिया बयान, कहा - मौद्रिक नीति रूपरेखा की समीक्षा कर रहा RBI

Sun, 23 Feb 2020 04:55 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sun, 23 Feb 2020 04:55 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति निर्णय में खुदरा मुद्रास्फीति के लक्ष्य की रूपरेखा के साथ उसकी प्रभावित की समीक्षा कर रहा है। 

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Governor Shaktikanta Das says RBI reviewing monetary policy framework
RBI Governor Shaktikanta Das - फोटो : ANI

विस्तार

शक्तिकांत दास ने कहा है कि इस बारे में सरकार समेत संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श की योजना है। सरकार ने मुद्रास्फीति को निश्चित सीमा के दायरे में रखने के प्रयास के तहत साल 2016 में आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति गठित करने का फैसला किया। समिति को नीतिगत दर (रेपो दर) निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 

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महंगाई दर को 4 फीसदी पर रखने की जिम्मेदारी 

छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति को 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ महंगाई दर को 4 फीसदी पर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस संदर्भ में दास ने कहा है कि, 'मौद्रिक नीति रूरपेखा साढे तीन साल से काम कर रहा है। हमने आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है कि आखिर मौद्रिक नीति रूपरेखा ने किस तरीके से काम किया। हमने आंतरिक रूप से मौद्रिक नीति रूपरेखा के प्रभाव की समीक्षा शुरू की है। चालू वर्ष के मध्य में जून के आसपास हम सभी विश्लेषकों और विशेषज्ञों तथा संबद्ध पक्षों के साथ बैठक करेंगे। इस बारे में सरकार की भी सलाह ली जाएगी।' 

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ग्राहकों को मिल रहा है लाभ

आगे उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से आरबीआई को सरकार से बातचीत करनी है क्योंकि रूपरेखा कानून का हिस्सा है। मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों को मिलने के संदर्भ में गवर्नर ने कहा कि इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और आने वाले समय में यह और बेहतर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में सुधार आया है। दिसंबर एमपीसी में नए कर्ज में 0.49 फीसदी का लाभ ग्राहकों को दिया गया जबकि फरवरी में यह बढ़कर 0.69 फीसदी हो गया है। यानी इसमें सुधार आया है।'

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5.15 फीसदी पर बरकरार है रेपो दर

बता दें कि आरबीआई ने छह फरवरी 2020 को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दर रेपो को 5.15 फीसदी पर बरकरार रखा। दिसंबर में नीतिगत दर को यथावत रखने से पहले लगातार पांच बार नीतिगत दर में कटौती की गई। इसमें कुल 1.35 फीसदी की कटौती की गई। 

जुलाई में शुरू होगा अगला वित्त वर्ष 

उन्होंने कहा कि, 'मौजूदा वर्ष जून तक होगा। अगला लेखा वर्ष एक जुलाई को शुरू होगा और 31 मार्च को समाप्त होगा। अत: 12 महीने का समय होगा।' केंद्रीय बैंक के पास नौ महीने ( जुलाई 2020 से मार्च 2021 ) की अवधि के लिए बही-खाता तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। आरबीआई का पूर्ण वित्त वर्ष एक अप्रैल 2021 से शुरू होगा। इस कदम के साथ आरबीआई करीब आठ दशक से चले आ रहे लेखा वर्ष को समाप्त करेगा। 



इससे पहले अप्रैल 1935 में गठित आरबीआई शुरू में जनवरी-दिसंबर को लेखा वर्ष मानता था लेकिन मार्च 1940 में दसे बदलकर जुलाई-जून कर दिया गया। आर्थिक पूंजी रूपरेखा पर गठित विमल जालान समिति ने आरबीआई लेखा वर्ष को 2020-21 अप्रैल-मार्च करने का सुझाव दिया था।

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