प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का बयान- बाढ़ ने बढ़ा दी मुश्किलें
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देश भर में प्याज की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिशों के बीच सरकार ने इसके लिए कई राज्यों में आई बाढ़ और बारिश को जिम्मेदार माना है। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि सरकार इसकी कीमतों में कमी लाने की पूरी कोशिश कर रही है। फिलहाल इसका 50 हजार टन का बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे मंडियों में आवक को बढ़ाया जा रहा है।
बाढ़, बारिश ने बिगाड़े हालत
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बाढ़ और बारिश ने हालत काफी खराब कर दिए हैं। इस वजह से किसान भी अपनी फसल को मंडियों मे बेचने के लिए नहीं ला पा रहे हैं। पासवान ने कहा कि फिलहाल इन दोनों राज्यों में से आवक को बढ़ाने के लिए सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है।
Union Min of Food & Public Distribution on #OnionPrice: You have seen the situation due to floods in several parts of country like in Maharashtra, Madhya Pradesh etc, the transportation is disturbed, that is also one of the reasons. We have kept 50,000 ton onion in buffer stock. pic.twitter.com/lDcxPzGooh
— ANI (@ANI) September 24, 2019
80 रुपये पहुंची कीमत
देश के कई शहरों में प्याज का फुटकर भाव 40 रुपये से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। ऐसे में केंद्र सरकार प्याज व्यापारियों के भंडारण की सीमा तय करने पर विचार कर रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले सप्ताह प्याज की खुदरा कीमत 57 रुपये किलो रही। वहीं मुंबई में यह 56 रुपये, कोलकाता में 48 रुपये और चेन्नई में 34 रुपये किलो थी। गुरुग्राम और जम्मू में प्याज 60 रुपये किलो पर पहुंच गया है।
हालांकि, आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह के अंत तक प्याज के खुदरा दाम 70 से 80 रुपये किलो पर पहुंच गए। इससे पिछले सप्ताह यह 50 से 60 रुपये किलो थे।
केंद्र सरकार ने प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद प्याज के दाम चढ़ रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ सप्ताह के दौरान घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर अंकुश के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन पिछले दो-तीन दिन में उत्पादक राज्यों में भारी बारिश की वजह से आपूर्ति प्रभावित होने से प्याज की खुदरा कीमतों में भारी इजाफा हुआ है।
सूत्र ने कहा कि आपूर्ति में यह बाधा सीमित समय के लिए है। यदि अगले दो-तीन दिन में स्थिति सामान्य नहीं होती है तो सरकार व्यापारियों के लिए गंभीरता से भंडारण की सीमा तय करने पर विचार कर रही है।मौसम विभाग के अनुसार प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों विशेषरूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में पिछले दो दिन में अत्यधिक बारिश हुई है। व्यापारियों का कहना है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में अभी भंडारण वाला प्याज बेचा जा रहा है। खरीफ या गर्मियों की फसल नवंबर से बाजार में आएगी।