दिवाली पर 1500 करोड़ का होगा गिफ्ट कारोबार, पहले नंबर पर गाड़ियां-डायमंड सेट
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दिवाली की दस्तक के साथ गिफ्टों का कारोबार बढ़ने लगा है। कॉरपोरेट कंपनियों के कारण इसके बाजार में तेजी से विस्तार हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक इस दिवाली अकेले एनसीआर में करीब 500 करोड़ के कारोबार होने का अनुमान है। पूरे देश में यह आंकड़ा 1500 करोड़ के पार जा सकता है। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो गिफ्ट कारोबार में बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट और बिजनेस रिलेशन गिफ्ट का है। इसके साथ ही अब इसे इमेज बिल्डिंग व रिलेशन से जोड़कर देखा जाने लगा है, लेकिन बीते वर्ष के मुकाबले इस बार गिफ्ट का कारोबार में मंदी है।
एसोचैम के पूर्व महासचिव डीएस रावत कहते हैं कि पर्व खुशियों का है। बाजार में पैसे का अभाव और छोटी कंपनियों में स्थिरता व कामकाज कम होने के कारण गिफ्ट कारोबार प्रभावित हुआ है। फॉर्च्यून कंपनियों के अलावा आईटी कंपनियां होने के कारण गिफ्ट का कारोबार हो रहा है।
अनुमानित तौर पर करीब 1500 करोड़ का कारोबार हो सकता है। कॉरपोरेट में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग बिजनेस को ध्यान में रखते हुए महंगे गिफ्टों के जरिये अपना रिश्ता बनाने के लिए महंगे गिफ्ट देते हैं। इसमें लग्जरी गाड़ी और महिला सीईओ व अधिकारियों के लिए डायमंड की ज्वेलरी सेट पहले स्थान पर है।
टाटा मोटर्स के एक अधिकारी बताते हैं कि गाड़ियों की बुकिंग हो रही है। इसमें कई तो दूसरे के नाम से बुक कराते हैं, जो अक्सर गिफ्ट के लिए होता है। इसमें एसयूवी लग्जरी गाड़ी से लेकर बाइक व स्कूटी तक शामिल है।
इनवेस्टमेंट प्लान व ऑनलाइन गिफ्ट का ट्रेंड
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑफ इंडिया (एसोचैम) और चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक अब गिफ्ट का ट्रेंड बदल रहा है। हेल्थ इंश्योरेंस, फ्लैट और इंवेस्टमेंट प्लान तक बतौर गिफ्ट देने का प्रचलन आया है, लेकिन यह कॉरपोरेट के एक तबके तक सीमित है। वहीं, ऑनलाइन गिफ्ट और ऑन डिमांड की सर्विस ने अपर-मीडिल क्लास में गिफ्ट का रिवाज पैदा कर दिया है।
दिवाली पर गिफ्ट देने के यह भी है कारण
उद्योग विशेषज्ञ रावत बताते हैं इंडस्ट्री में बिजनेस डीलिंग से लेकर क्लाइंट सर्विसिंग और बिजनेस रिलेशन महत्वपूर्ण है। इस मौके पर कॉरपोरेट में बिजनेस रिलेशन, नेटवर्किंग-मार्केटिंग डेवलप करने के लिए गिफ्ट की परंपरा शुरू हुई है।
इमेज कंसल्टेंट संगीत बहल कहती है कि गिफ्ट अब इमेज बिल्डिंग का हिस्सा है। इसमें अधिकांश तौर पर स्टैंडर्ड और स्टेटस के हिसाब से परखा जाता है। अब कंपनी की मार्केट वैल्यू भी गिफ्टिंग में ध्यान रखा जाने लगा है।