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जुलाई से नहीं होगी खाद्य तेलों में मिलावट, लागू होगा नया कानून

Fri, 01 Mar 2019 10:55 AM IST
paliwal पालीवाल शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 01 Mar 2019 10:55 AM IST
सार

  • वनस्पति घी के साथ ब्लेंडेड ऑयल के नाम पर सोयाबीन, सूर्यमुखी या सरसों तेल में भी होती मिलावट 
  • 90 रुपये प्रति लीटर सोयाबीन और सूर्यमुखी तेलों का आयात मूल्य जबकि पॉम ऑयल का महज 45 रुपये लीटर 
  • दो करोड़ टन खाद्य तेलों की खपत देश में सालाना, जबकि घरेलू उत्पादन 65 लाख टन 
  • खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण से नियमों को कठोर बनाने की सिफारिश थी 

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from july adulteration in cooking oils will become punishable offence

विस्तार

सरसों, सूर्यमुखी, सोयाबीन जैसे अपेक्षाकृत महंगे खाद्य तेलों में सस्ते पाम ऑयल की मिलावट अब आसानी से नहीं हो सकेगी। यही नहीं, वनस्पति घी में भी यदि निर्माता पाम ऑयल या किसी अन्य तेल का मिश्रण करते हैं, तो उन्हें मिश्रण के अनुपात की जानकारी देनी होगी। मिलावट को रोकने का यह नया नियम एक जुलाई 2019 से देशभर में लागू होगा।
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भारत में हर साल करीब दो करोड़ टन खाद्य तेलों की खपत होती है, जबकि यहां घरेलू उत्पादन करीब 65 लाख टन ही है। इस वजह से यहां हर साल बड़ी मात्रा में खाद्य तेलों का आयात करना पड़ता है। साथ ही भारत में प्रसंस्करण के बाद खाद्य तेलों का निर्यात भी कुछ देशों में किया जाता है।
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2017 में 1.55 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात किया गया था, जिसमें से 98 फीसदी पामोलीन, सोयाबीन और सूर्यमुखी के तेल शामिल थे। सोयाबीन और सूर्यमुखी के तेलों का आयात मूल्य जहां 70 से 90 रुपये प्रति लीटर पड़ता है। वहीं पाम ऑयल का मूल्य महज 40 से 45 रुपये लीटर पड़ता है।
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इसलिए पाम ऑयल के भरोसे न सिर्फ वनस्पति घी उद्योग चलता है, बल्कि ब्लेंडेड ऑयल के नाम पर सोयाबीन, सूर्यमुखी या सरसों तेल में भी इसकी भरपूर मिलावट होती है। खाद्य तेल बनाने या बेचने वाली कंपनियों की इसी करतूत पर नकेल कसने को सरकार ने अब मिश्रित या ब्लेंडेड खाद्य तेलों के बारे में नया मानक अधिसूचित किया है।

लिखना होगा मिश्रण का प्रतिशत

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक सस्ते पाम ऑयल की मिलावट की शिकायत के बाद इस बारे में खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण से नियमों को कठोर बनाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद बीते एक जून को जनता के समक्ष एक अधिसूचना का मसौदा जारी किया गया था।

इस पर सभी हितधारकों की प्रतिक्रिया लेने को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किया गया है, जो आगामी एक जुलाई से लागू होगा। अब ब्लेंडेड ऑयल की प्रत्येक पैकिंग पर खाद्य वनस्पति तेल का नाम और उसकी प्रकृति (क्रूड या रिफाइंड) के साथ विभिन्न प्रकार के तेलों के भार के अनुसार प्रतिशत भी लिखना होगा। 

from july adulteration in cooking oils will become punishable offence

महीन नहीं बड़े अक्षरों में देनी होगी जानकारी

अक्सर इस तरह की वैधानिक घोषणा इतने महीन अक्षरों में की जाती है कि वह आसानी से दिखे ही नहीं। इसलिए इस बार ऐसा प्रावधान कर दिया गया है कि घोषणा का आकार पांच मिलीमीटर से कम नहीं होगा, जबकि प्रतिशत के अक्षरों का आकार तीन मिलीमीटर से कम में नहीं होगा। यही नहीं, यदि तेल की पैकिंग पांच लीटर या उससे ज्यादा की हो तो उसके कंटेनर पर कम से कम 10 मिलीमीटर आकार में लिखना होगा कि इसकी खुली बिक्री न की जाए (नोट टू बी सोल्ड लूज)। 

90 लाख पाम ऑयल का आयात

वैश्विक संस्था राउंडटेबल ऑन सस्टेनेबल पाम ऑयल (आरएसपीओ) के भारत में प्रतिनिधि कमल प्रकाश सेठ का कहना है कि भारत में हर साल करीब डेढ़ करोड़ खाद्य तेलों का आयात होता है, जिसमें से करीब 90 लाख टन पाम आयल होता है। पाम की खेती के लिए मलेशिया-इंडोनेशिया आदि में न सिर्फ अवैध तरीके से जंगलों का सफाया हो रहा है बल्कि वहां काम करने वाले मजदूरों का शोषण भी हो रहा है। 

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