रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार, जानिए इससे भारत को कैसे होगा फायदा
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देश का विदेशी मुद्रा भंडार चार दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 4.525 अरब डॉलर बढ़कर 579.346 अरब डालर की रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों में यह बताया गया। इससे पिछले 27 नवंबर को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 46.9 करोड़ डॉलर घटकर 574.821 अरब डॉलर रह गया था।
इसलिए आई तेजी
समीक्षाधीन अवधि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में भारी वृद्धि के कारण मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई। विदेशीमुद्रा परिसंपत्तियां, कुल विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा होती है। रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार समीक्षावधि में एफसीए 3.932 अरब डॉलर बढ़कर 537.386 अरब डॉलर हो गयीं। एफसीए को दर्शाया डॉलर में जाता है, लेकिन इसमें यूरो, पौंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती है।
53.5 करोड़ डॉलर बढ़ा स्वर्ण भंडार का मूल्य
आंकड़ों के अनुसार चार दिसंबर को समाप्त सप्ताह समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान देश का स्वर्ण भंडार का मूल्य 53.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 35.728 अरब डॉलर रह गया। देश को अंतरराष्ट्रीय मु्द्रा कोष (आईएमएफ) में मिला विशेष आहरण अधिकार 1.2 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 1.506 अरब डॉलर और आईएमएफ के पास जमा मुद्रा भंडार 4.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.725 अरब डॉलर हो गया।
क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार देश के केंद्रीय बैंकों द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं, जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। यह आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था को बहुत आवश्यक मदद उपलब्ध कराता है। इसमें आईएमएफ में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।
आइए जानते हैं इसके फायदे।
विदेशी मुद्रा भंडार के चार बड़े फायदे
- साल 1991 में देश को पैसा जुटाने के लिए सोना गिरवी रखना पड़ा था। तब सिर्फ 40 करोड़ डॉलर के लिए भारत को 47 टन सोना इंग्लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था। लेकिन मौजूदा स्तर पर, भारत के पास एक वर्ष से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त मुद्रा भंडार है। यानी इससे एक साल से अधिक के आयात खर्च की पूर्ति सरलता से की जा सकती है, जो इसका सबसे बड़ा फायदा है।
- अच्छा विदेशी मुद्रा आरक्षित रखने वाला देश विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास अर्जित करता है। इससे वैश्विक निवेशक देश में और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं।
- सरकार जरूरी सैन्य सामान की तत्काल खरीदी का निर्णय बी ले सकती है क्योंकि भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है।
- इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावी भूमिका निभा सकता है।