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दुनिया भर में अपना वर्चस्व बढ़ाने में लगा चीन, अब मध्य यूरोप के 17 देशों पर नजर

Sat, 16 Jan 2021 03:04 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 16 Jan 2021 03:04 PM IST
सार

  • ईयू के बाद अब चीन ने ‘17+1’ देशों को लुभाया, फरवरी में होगी शिखर वार्ता
यूरोपियन यूनियन (ईयू) से निवेश समझौता करने के बाद चीन ने अब पूर्वी और मध्य यूरोपीय देशों के साथ अपनी शिखर बैठक को फिर से शुरू करने के मकसद में कामयाबी पा ली है।

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Europes New Pact With China Is Terribly Timed
यूरोपीय संघ एवं चीन के ध्वज - फोटो : iStock

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) से निवेश समझौता करने के बाद चीन ने अब पूर्वी और मध्य यूरोपीय देशों के साथ अपनी शिखर बैठक को फिर से शुरू करने के मकसद में कामयाबी पा ली है। यहां के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी एक खास खबर में बताया है कि ‘17+1’ कहे जाने वाले इन देशों के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की फरवरी के आरंभ में शिखर वार्ता होगी।

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ये बातचीत वीडियो लिंक के जरिए होगी। इसके पहले साल भर तक इसको लेकर गतिरोध बना रहा। विश्लेषकों ने कहा है कि इस शिखर वार्ता का फिर से शुरू होना भी यही संकेत देता है कि यूरोप के साथ चीन के संबंधों में नई गति आ गई है।
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जानकारों के मुताबिक ईयू के साथ व्यापक निवेश समझौते पर पिछले महीने सहमति बन जाने के बाद 17 मध्य यूरोपीय देश भी अपना एतराज छोड़ कर चीन से बातचीत शुरू करने पर राजी हो गए हैं। राजनयिकों का कहना है कि वार्ता दोबारा शुरू करने के लिए चीन ने नए प्रस्ताव रखे। राजनयिकों का कहना है कि चीन यूरोप के साथ संबंधों में आए सकारात्मक दौर को कायम रखते हुए इसे और आगे बढ़ाना चाहता है।
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कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चीन अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन को एक और संदेश भेजना चाहता है कि यूरोप के साथ उसके घनिष्ठ संबंध बन चुके हैं। ये आम धारणा है कि डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने यूरोपीय देशों की अनदेखी की, जिससे खासकर वहां के छोटे देश चीन के पाले में जाने को मजबूर हो गए।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर के मुताबिक शिखर वार्ता 12 फरवरी को चीन का नया वर्ष शुरू होने से पहले होगी। बातचीत का एजेंडा क्या होगा, इस बारे में ज्यादा जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। राजनयिकों ने इस अखबार से कहा कि अभी एजेंडे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पहले दोनों पक्ष इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और सांस्कृतिक आदान- प्रदान के लिए हर साल दिशा निर्देश जारी करते थे। इस वार्ता के साथ इसकी फिर से शुरू हो सकती है।

ये शिखर वार्ता आखिरी बार अप्रैल 2019 में क्रोएशिया के शहर दुब्रोवनिच में हुई थी। 2012 में 17+1 समूह बनने के बाद यह आठवीं वार्ता थी। लेकिन उस बातचीत के बाद यूरोपीय देशों में ये शक पैदा हो गया कि चीन बांटों और राज करो की नीति पर चल रहा है। इस कारण दोनों पक्षों का संवाद एक तरह से ठहर गया। इसे फिर शुरू करने की कोशिश में चीन ने इस समूह से बातचीत का दर्जा बढ़ा दिया। पहले इस वार्ता के लिए एक सामान्य प्रतिनिधि नियुक्ति था। लेकिन पिछले साल चीन के प्रधानमंत्री ली किछियांग इसमें चीन के प्रतिनिधि बनाए गए। 17+1 समूह से 13 देश ईयू के सदस्य भी हैं।

पिछले साल चीन ने इच्छा जताई थी कि 17+1 समूह के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री वार्ता में शामिल हों। लेकिन चेक गणराज्य के राष्ट्रपति मिलोस जिमान ने इस आमंत्रण को ठुकरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने उनके देश में और अधिक निवेश करने का अपना वादा नहीं निभाया है। उसके बाद ताइवान के मुद्दे को लेकर भी चेक गणराज्य और चीन के संबंधों में तनाव बढ़ गया। चीन ने बीते दिसंबर में ये शिखर वार्ता आयोजित करने की फिर पेशकश की थी। लेकिन तब भी उसे कामयाबी नहीं मिली।


जानकारों का कहना है कि उसके बाद चीन ने पहले ईयू के साथ निवेश समझौता करने को अपनी प्राथमिकता बना ली। पिछले 30 दिसंबर को उसे अंतिम रूप दे दिया गया। उसके बाद 17+1 देशों को चीन से दूरी बनाए रखना अपने हित में नहीं लगा। इसीलिए अब वे शिखर वार्ता फिर से शुरू करने को राजी हो गए हैं।

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