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EPFO: कर्मियों-पेंशनभोगियों के लिए उच्च पेंशन का विकल्प चुनने के निर्देश जारी किए, जानें क्या है इसके मायने

Wed, 22 Feb 2023 01:06 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Wed, 22 Feb 2023 01:06 PM IST
सार

EPFO: जिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने ईपीएस में योगदान दिया था और 1 सितंबर, 2014 से पहले वास्तविक वेतन पर उच्च पेंशन के लिए ईपीएस के पाराग्राफ 11(3) संयुक्त विकल्प का उपयोग नहीं किया था वे अब बढ़ी हुई पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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EPFO issues guidelines for employees, pensioners to opt for higher pension
ईपीएफओ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कई दिनों की चर्चा के बाद सोमवार को अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को एक परिपत्र जारी किया है। इस परिपत्र में उच्च भविष्य निधि (पीएफ) पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट के चार नवंबर के फैसले को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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इस परिपत्र में मौजूदा कर्मचारियों और एक सितंबर 2014 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के लिए कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में निर्धारित सीमा से अधिक वास्तविक वेतन के आधार पर उच्च पेंशन का दावा करने की प्रक्रियाओं और आवश्यक दस्तावेजों को सूचीबद्ध किया गया है।
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ईपीएफओ की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार कर्मचारी ईपीएफओ वेबसाइट के सदस्य अनुभाग का उपयोग करके नियोक्ताओं के साथ संयुक्त विकल्प का उपयोग कर पेंशन की राशि बढ़ाने का आवेदन दे सकते हैं। इसके लिए आवेदन "जल्द ही" उपलब्ध कराया जाएगा।

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नियोक्ता संगठनों ने परिपत्र का किया है स्वागत, ट्रेड यूनियन नाराज 
नियोक्ता संगठनों ने जहां परिपत्र का स्वागत किया है, वहीं ट्रेड यूनियनों ने कहा कि इसमें उच्चतम न्यायालय की ओर से सुझाई गई तारीख से देरी हुई है। इससे पेंशनभोगियों को विकल्प का इस्तेमाल करने में असुविधा होगी क्योंकि संयुक्त विकल्प जमा करने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित समयसीमा तीन मार्च को समाप्त हो जाएगी।

क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (पेंशन) अपराजिता जग्गी ने परिपत्र में कहा कि जिन कर्मचारियों ने ईपीएस के पैराग्राफ 11 (3) के अनुसार संयुक्त विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है वे संयुक्त विकल्प का इस्तेमाल करने के हकदार होंगे।

जिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने ईपीएस में योगदान दिया था और 1 सितंबर, 2014 से पहले वास्तविक वेतन पर उच्च पेंशन के लिए ईपीएस के पाराग्राफ 11(3) संयुक्त विकल्प का उपयोग नहीं किया था वे अब बढ़ी हुई पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भविष्य निधि से पेंशन कोष में समायोजन और निधि में किसी भी तरह की रिडिपॉजिट के लिए ईपीएफओ को नियोक्ता के साथ संयुक्त सहमति देना पड़ेगा।

बयान में कहा गया है, 'छूट प्राप्त भविष्य निधि न्यास से ईपीएफओ के पेंशन कोष में धन के हस्तांतरण के मामले में ट्रस्टी का एक हलफनामा जमा करना होगा। जग्गी ने परिपत्र में कहा, "यह वचन इस आशय का होगा कि भुगतान की तारीख तक ब्याज के साथ देय योगदान निर्दिष्ट अवधि के भीतर जमा किया जाएगा।"

कैसे होगी पेंशन की गणना?
परिपत्र में कहा गया है, 'गैर-छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के मामले में नियोक्ता के योगदान के आवश्यक हिस्से की वापसी, ईपीएफ योजना 1952 के पैरा 60 के घोषित दर पर वास्तविक रिफंड की तारीख तक ब्याज के साथ जमा की जाएगी।'

नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्य केई रघुनाथन ने कहा कि परिपत्र ने अधिक वेतन पर पेंशन मांगने के लिए प्रक्रिया को स्पष्टता के साथ सरल बना दिया है। उन्होंने कहा, 'इससे अन्य सभी अटकलों पर विराम लग गया है। हमें जटिलता और वित्तीय प्रभावों की सराहना करनी चाहिए।'

सीबीटी में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य एके पद्मनाभन ने कहा कि ईपीएफओ ने संयुक्त विकल्पों के परिपत्र में देरी करके और कई पेंशनभोगियों को अपनी उच्च पेंशन वसूलने के लिए नोटिस देकर कर्मचारियों के साथ पहले ही अन्याय किया है। पीठ ने कहा, ''25 जनवरी के परिपत्र को सही किया जाना चाहिए। नए परिपत्र में संयुक्त विकल्प जमा करने की तारीख अभी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय समयसीमा 3 मार्च को समाप्त होनी है

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई समय सीमा 3 मार्च के समाप्त होने में अब थोड़े ही दिन शेष हैं। 10 दिनों में पेंशनभोगियों और कर्मचारियों को कई दस्तावेज जमा करने होंगे। ईपीएफओ को 29 दिसंबर से पहले प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए थी। ईपीएफओ सभी फैसले एकतरफा ले रहा है। सीबीटी की बैठक तुरंत बुलाई जानी चाहिए।

पेंशनभोगियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले वकील एस. कृष्णा मूर्ति ने कहा कि ईपीएफओ ने उच्च पेंशन के लिए जो शर्तें रखी हैं वे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'इन शर्तों को संभवत: इस मौके का इंजतार कर रहे अधिकतर पेंशनभोगियों के दावे को विफल करने के मकसद से शामिल किया गया है।'

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