Election Commission: गैरमान्यता प्राप्त 2100 पंजीकृत दलों पर शिकंजा कसा, चुनाव आयोग बड़ी कार्रवाई की तैयारी में
आयोग ने यह भी बताया कि 2354 पंजीकृत गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों में से 92 फीसदी ने 2019 में अपनी सहभागिता रिपोर्ट दाखिल नहीं की। ऐसे 199 दलों में 2018-19 में 445 करोड़, और 219 दलों ने 2019-20 में 608 करोड़ की आयकर की छूट का दावा पेश किया था।
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चुनाव आयोग ने गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत 2100 सियासी दलों पर शिकंजा कस दिया है। आयोग नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त दलों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। बुधवार को आयोग की ओर से कहा गया कि ऐसे 66 दलों ने आयकर की छूट का दावा किया था, जिन्होंने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के आवश्यक शर्तों का अनुपालन नहीं किया। जबकि 2174 दलों ने सहभागिता रिपोर्ट नहीं सौंपी। सांविधिक नियमों का उल्लंघन करते हुए चंदा लेने वाले दलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। वजूद में न रहने वाले 87 दलों को चुनाव चिह्न आदेश (1968) के तहत लाभ पाने वाले दलों की सूची से हटा दिया गया है।
सितंबर 2021 में गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों की संख्या 2796 थी। 2001 से इनकी संख्या में 300 फीसदी का इजाफा देखा गया। 15 मई को राजीव कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की गई। पहले महत्वपूर्ण निर्णय में उन्होंने बैंकों से निष्क्रिय कंपनियों को कंपनियों के रजिस्टर से हटाने के लिए कहा था। 2017-18 में 2.26 लाख निष्क्रिय कंपनियों को अपंजीकृत किया गया। इसके बाद बैंकों को कारपोरेट कर्जदारों की घेरेबंदी करने के लिए कहा गया। जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित करने के लिए यह भी कहा गया कि बैंक यह भी सुनिश्चित करें कि कारपोरेट कर्जदार अपनी आमदनी को अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग न कर सकें।
जांच में 87 दलों का नहीं मिला कोई वजूद
आयोग ने यह भी बताया कि 2354 पंजीकृत गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों में से 92 फीसदी ने 2019 में अपनी सहभागिता रिपोर्ट दाखिल नहीं की। ऐसे 199 दलों में 2018-19 में 445 करोड़, और 219 दलों ने 2019-20 में 608 करोड़ की आयकर की छूट का दावा पेश किया था। इन सभी दलों ने फार्म 24 ए के तहत सहभागिता रिपोर्ट नहीं दाखिल की थी जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 सी के तहत आवश्यक है। यह भी कहा गया कि 87 दलों का तो कोई वजूद ही नहीं मिला। 2019 के लोकसभा चुनाव में 2354 गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों में से सिर्फ 623 ने शिरकत की थी।
आयोग ने जताई चिंता
आयोग ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि 70 फीसदी दलों ने चुनाव में हिस्सेदारी ही नहीं की। इससे चुनावी स्वच्छ चुनाव प्रणाली प्रभावित हो रही है। 87 दलों ने चुनाव आयोग को अपने पते बदल जाने की जानकारी भी नहीं दी। भौतिक सत्यापन में इन दलों का अस्तित्व नहीं मिला। ऐसे दलों को गैरमान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों की सूची से हटाया जाएगा। इस फैसले से क्षुब्ध कोई भी दल 30 दिन के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर सकता है। तीन दल प्रथम दृष्ट्या गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त पाए गए। उनके पास चंदे और फर्जी खरीद-फरोख्त की रसीदें भी मिली हैं। दुरुपयोग की जानकारी देने वाले राजस्व विभाग को इससे अवगत करा दिया गया है।