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Edtech Sector: 2021 में तीसरा सबसे कमाई वाला क्षेत्र था एडटेक सेक्टर, लेकिन अब छंटनी की मार से हो रहा बेहाल
Fri, 03 Jun 2022 02:20 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Fri, 03 Jun 2022 02:20 PM IST
सार
इस साल की शुरुआत के बाद 1,400 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भारतीय एडटेक कंपनियों ने नौकरी से निकाल दिया है। मई की अगर बात करें तो ऑनलाइन ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म वेदांतु ने अपने लगभग 600 कर्मचारियों की छंटनी की, जो कि इसके कुल कर्मचारियों की संख्या का सात फीसदी है।
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एडटेक सेक्टर में छंटनी की मार।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत में एडटेक सेक्टर साल 2021 में सबसे अधिक वित्त पोषित क्षेत्र के रूप में उभरा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र ने 4.7 अरब डॉलर का फंड जुटाया। हालांकि, हालिया समय में शुरू हुई छंटनी ने विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है कि यह क्षेत्र हर समय एक बुलबुले में था, जो अब फूटने लगा है।
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कोरोना काल में रहा मालामाल
गौरतलब है कि कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद ऑनलाइन लर्निंग का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह लगातार जारी है। महामारी काल के दौरान इस उद्योग में जबरदस्त उछाल देखे को मिला। लेकिन अब ताजा हालातों को देखते हुए विशेषज्ञों की राय है कि इस क्षेत्र को फिर से फोकस करना होगा और अपने बिजनेस मॉडल को बदलना होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि डिजिटलीकरण के दौर में तकनीक की मदद से शिक्षा मुहैया करना अब बड़ा कारोबार बन गया है। यही कारण है कि 2021 में यह क्षेत्र तेजी से फला-फूला।
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चार यूनिकॉर्न के आंकड़ों का मंथन
रिपोर्ट में दो वर्षों में चार यूनिकॉर्न का मंथन किया गया। कोविड -19 महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखना पड़ा। 202o में Unacademy ने एक अरब डॉलर का वैल्यूएशन हासिल किया, जबकि UpGrad, Vedantu और Eruditus 2021 में यूनिकॉर्न बन गए। भारत का पहला एडटेक स्टार्टअप, बायजू, जिसकी कीमत लगभग 22 अरब डॉलर है, देश के सबसे महंगे स्टार्टअप्स में से एक है। इन एडटेक स्टार्टअप की सफलता की कहानियों से प्रेरित होकर, पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई नए एडटेक स्टार्टअप तेजी से उभरे हैं, जिससे उद्योग का बाजार आकार लगभग दो बिलियन डॉलर हो गया है।
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विशेषज्ञ बोले- मंदी का करना था एलान
हालांकि, हालिया छंटनी ने विशेषज्ञों को चिंतित जरूर कर दिया है। नई दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (एनआईईपीए) में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए इकाई के उप सलाहकार एल्धो मैथ्यूज ने इस मामले में अपनी राय रखते हुए बताया कि एडटेक उद्योग एक समर्थन तंत्र के रूप में विकसित होगा। लेकिन यह कक्षाओं की जगह कभी नहीं ले सकता है। मैथ्यूज का मानना है कि एड-टेक स्टार्टअप सेक्टर को कोरोना महामारी के घटने के बाद मंदी की भविष्यवाणी करनी चाहिए थी।
इस तरह शिक्षकों को हुआ नुकसान
फिलहाल के हालातों की बात करें तो मार्च 2022 में 26 वर्षीय यशराज सिंह चौहान तीन महीने के अनुबंध पर एक शिक्षक के रूप में ऑनलाइन परीक्षा तैयारी मंच Unacademy से जुड़े थे। उन्हें बताया गया था कि यदि तय टारगेट को पूरा करते हैं और कम से कम एक मिलियन व्यूज प्राप्त करते हैं तो उनके मूल वेतन का 30 फीसदी का इजाफा होगा, साथ ही अनुबंध भी बढ़ाया जाएगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश में अपने पैतृक शहर झांसी में चार साल से छात्रों को कोचिंग दे रहे चौहान ने अपने कई मौजूदा छात्रों को Unacademy के लिए साइन अप कराया, लेकिन महज दो महीने बाद उन्हें कंपनी से ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया था कि उनकी सेवाओं की अब जरूरत नहीं है।
साल की शुरुआत में 1400 शिक्षक बाहर
यशराज चौहान उन 1,400 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में से हैं, जिन्हें इस साल की शुरुआत से भारतीय एडटेक कंपनियों ने नौकरी से निकाल दिया है। मई में, ऑनलाइन ट्यूटरिंग प्लेटफॉर्म वेदांतु ने लगभग 425 कर्मचारियों की छंटनी की, जो कि इसके कुल कर्मचारियों की संख्या का सात फीसदी है। कुछ ही हफ्तों बाद, इसने 200 और कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। फरवरी में, स्कूली छात्रों को ऑनलाइन कक्षाएं प्रदान करने वाले लीडो ने 1,200 कर्मचारियों को बाहर कर दिया। 13 मई को, बायजू के स्वामित्व वाले व्हाइटहैट जूनियर के लगभग 800 शिक्षकों से कार्यालय से काम फिर से शुरू करने के लिए कहने के बाद, अचानक बिना किसी लाभ के इस्तीफा देने के लिए कह गया।